आगरा
ताजमहल (तेजोमहालय) में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों पर पूजा अर्चना की मांग पर होने वाली सुनवाई टाल दी गई है। प्रतिवादी पक्ष एएसआई और मुस्लिम पक्षकार के अधिवक्ताओं ने न्यायालय से समय मांग लिया है, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है। अब अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी।
इधर वादी पक्ष का कहना है कि बार बार समय मांग कर मामले को लंबित करने का प्रयास है। प्रतिवादी पक्ष अदालत का समय बर्बाद कर रहा है, उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं। जबकि हम साक्ष्यों के आधार पर ताजमहल को शिव मंदिर तेजोमहालय बता रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि अब वे प्रयागराज में जाकर प्रमुख संतों के अखाड़ों में जाकर समर्थन मांगेंगे।
प्रतिवादी पक्ष की दलीलों पर सुनवाई टली
23 जुलाई 2024 को योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष अजय तोमर ने आगरा की लघुवाद न्यायालय में अधिवक्ता द्वारा याचिका दाखिल की थी। वादकारी का पक्ष था कि सावन के महीने में वह ताजमहल (तेजोमहालय) में पूजा अर्चना और जलाभिषेक-दुग्धाभिषेक करना चाहते हैं। याचिकाकर्ता का तर्क था कि ताजमहल भगवान शिव का मंदिर है। मुगल आक्रांताओं ने मंदिर को तोड़कर उसका मुख्य ढांचा परिवर्तित कर दिया था। इस मामले में 20 जनवरी 2024 सोमवार को सुनवाई होनी थी, मगर प्रतिवादी पक्ष की दलीलों पर सुनवाई टाल दी गई है।
संतों से लिया जाएगा समर्थन पत्र
वादी कुंवर अजय तोमर का कहना है कि प्रतिवादी पक्ष अब तक कोर्ट में 3 बार समय ले चुका है। मामले को लंबित करने के लिए अदालत का समय बर्बाद किया जा रहा है। अब वे 26 जनवरी को प्रयागराज महाकुंभ में तेजोमहालय मुक्ति का अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही महाकुंभ में विभिन्न अखाड़ों जूना अखाडा, निर्वाणी अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा आदि प्रमुख संतों और महामंडलेश्वरों से ताजमहल (तेजोमहालय) आंदोलन को धार देने के लिए समर्थन पत्र लिया जाएगा।
6 मार्च को अगली सुनवाई
वादी अजय तोमर का कहना है कि प्रतिवादी एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. राजकुमार पटेल के अधिवक्ता और मामले में पक्षकार बनने की अर्जी देने वाले सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी के पास कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। हमारे साक्ष्य मजबूत है। उन्होंने कहा है कि अब वे साधु संतों से कहेंगे कि जैसे अयोध्या की लड़ाई जीती है। ऐसे ही तेजोमहालय की भी जीत होगी। अब अगली सुनवाई 6 मार्च को होनी है।
