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चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों की डिमोशन, अब मिली SI की पोस्ट, जानें पूरा मामला

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चंडीगढ़

इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों रिश्वतखोरी के केस में विभागी जांच में दोषी पाए गए हैं। विभागीय जांच के बाद उन्हें सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर डिमोट कर दिया गया है। यह कार्रवाई एक रिश्वतखोरी के मामले में उनकी कथित संलिप्तता की जांच के लिए सीबीआई द्वारा पुलिस विभाग को लिखे पत्र के बाद हुई। एक डीएसपी रैंक के अधिकारी ने इस मामले में विभागीय जांच की और सेखों को डिमोट करने की सिफारिश की। डीएसपी राम गोपाल ने इस मामले में जांच की और सेखों को आरोपों का दोषी पाया गया। सेखों पर आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज है।

यह पूरा मामला एक रिश्वतखोरी के आरोप से शुरू हुआ। सीबीआई ने पुलिस विभाग को सेखों की कथित संलिप्तता की जांच करने के लिए कहा था। एसएसपी (सुरक्षा और यातायात) सुमेर प्रताप सिंह ने जांच फाइल और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा की। जांच अधिकारी के निष्कर्षों से सहमत होते हुए, उन्होंने 16 दिसंबर को सेखों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इस नोटिस में उन्हें सब-इंस्पेक्टर के पद पर डिमोट करने का प्रस्ताव था। सेखों ने 23 दिसंबर को अपना जवाब दिया और व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध किया।

जवाबों में उन्हीं बातों को दोहराया
24 दिसंबर को सेखों को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया। एसएसपी ने उन्हें विस्तार से सुना। सेखों ने अपने जवाब में पहले से बताई गई बातों को ही दोहराया। एसएसपी ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद सेखों को सब-इंस्पेक्टर के पद पर डिमोट करने का आदेश दिया। सेखों पंजाब पुलिस नियमों के अनुसार एक महीने के अंदर अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष इस आदेश के खिलाफ अपील दायर कर सकते हैं।

आय से अधिक संपत्ति का केस भी है दर्ज
इस साल की शुरुआत में सीबीआई ने सेखों और उनकी पत्नी इंस्पेक्टर परमजीत कौर सेखों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (DA) का मामला दर्ज किया था। उन पर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह मामला अभी भी जांच के अधीन है। पिछले साल जुलाई में सीबीआई ने भाजपा नेता अनिल दुबे के भाई मनीष दुबे और अनिल गोयल उर्फ कूकी को 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। एक अन्य आरोपी हेड कांस्टेबल पवन उस समय फरार हो गया था।

सेखों पर लगा था ये आरोप
राम दरबार निवासी दीपक ने आरोप लगाया था कि कांस्टेबल पवन और तत्कालीन ऑपरेशन सेल प्रभारी इंस्पेक्टर सेखों ने रंगदारी के एक मामले से उसका नाम हटाने के लिए 7 लाख रुपये की मांग की थी। इन आरोपों के बाद सेखों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई थी और सीबीआई ने पुलिस विभाग को पत्र लिखा था। हालांकि, बाद में सीबीआई ने सेखों को क्लीन चिट दे दी थी। सीबीआई ने कहा था कि उन्हें शिकायतकर्ता और अन्य आरोपियों के साथ सेखों की कोई सीधी कॉल या बातचीत नहीं मिली। फरार हेड कांस्टेबल पवन को सीबीआई ने आरोप लगने के सात महीने बाद मार्च में गिरफ्तार किया था। बाद में उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

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