जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशील और समावेशी सोच को धरातल पर साकार करता कोटा जिले के मंडाना कस्बे में संचालित प्रदेश का एकमात्र “भिक्षावृत्ति एवं अन्य अवांछित गतिविधियों में लिप्त परिवारों के बालकों हेतु राजकीय आवासीय विद्यालय” आज सामाजिक परिवर्तन और पुनर्वास की एक अनूठी मिसाल बन चुका है। कभी विपरीत परिस्थितियों, आर्थिक तंगी और सामाजिक तिरस्कार के बीच रहने को मजबूर इन परिवारों के बच्चों ने इस वर्ष 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
राजस्थान का कोटा शहर जहाँ देश भर में कोचिंग और शिक्षा नगरी के रूप में विख्यात है, वहीं कोटा से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित मंडाना कस्बा अब उन बच्चों की स्वर्णिम सफलता की वजह से राष्ट्रीय पटल पर चर्चा में है। राज्य सरकार और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित इस विशेष आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत 10वीं और 12वीं के सभी 51 विद्यार्थियों ने परीक्षा में शत-प्रतिशत (100%) सफलता प्राप्त कर एक प्रेरणादायक कीर्तिमान स्थापित किया है। रमेशचंद ने 12वीं में 87.60% और नितेश ने 10वीं में 88.67% अंक पाकर बढ़ाया मान इस वर्ष विद्यालय का परीक्षा परिणाम बेहद चौंकाने वाला और सुखद रहा है। 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए कुल 20 विद्यार्थियों में से 17 ने प्रथम श्रेणी, 2 ने द्वितीय श्रेणी और 1 विद्यार्थी ने तृतीय श्रेणी प्राप्त की।
इनमें छात्र रमेशचंद ने 87.60 प्रतिशत और जगदीश ने 83 प्रतिशत अंक हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसी तरह 10वीं कक्षा में परीक्षा देने वाले सभी 31 विद्यार्थी सफल रहे, जिनमें से 13 छात्रों ने प्रथम श्रेणी और 18 ने द्वितीय श्रेणी प्राप्त की। 10वीं में छात्र नितेश कुमार ने 88.67 प्रतिशत और रामलखन ने 86 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की।
