पंजाब। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बुधवार को मानसा की जिला अदालत में मानहानि के एक बहुचर्चित मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए पेश हुए। पिछले कई अदालती समनों और पेशियों के दौरान मुख्यमंत्री व्यस्तताओं के चलते उपस्थित नहीं हो पा रहे थे, जिसके बाद आज की यह पेशी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अदालत में मुख्यमंत्री की पैरवी करते हुए पंजाब के एडवोकेट जनरल (AG) ने दलीलें और कानूनी पक्ष पेश किया। मामले की गंभीरता और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मानसा अदालत ने प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए आगामी 20 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है। यह पूरा मामला आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नाजर सिंह मानशाहिया द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ दायर किया गया था। कानूनी पृष्ठभूमि के अनुसार, नाजर सिंह मानशाहिया साल 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर मानसा सीट से विधायक चुने गए थे।
हालांकि, राज्य में तत्कालीन कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार बनने के बाद, मानशाहिया ‘आप’ का दामन छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। नाजर सिंह मानशाहिया के कांग्रेस में शामिल होने के तुरंत बाद भगवंत मान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर तीखे राजनीतिक हमले किए थे। मान ने आरोप लगाया था कि मानशाहिया ने कांग्रेस में जाने के लिए करोड़ों रुपये का गुप्त लेन-देन किया है और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पद का सौदा करके पार्टी बदली है।
इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और अपनी सामाजिक व राजनीतिक छवि को धूमिल करने वाला बताते हुए तत्कालीन विधायक नाजर सिंह मानशाहिया ने भगवंत मान के खिलाफ मानसा कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। पूर्व विधायक के वकील राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने मीडिया को बताया कि लंबे समय बाद आज मुख्यमंत्री अदालत के समक्ष वर्चुअली पेश हुए हैं और उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में न्यायोचित कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
