रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में बस्तर के दुर्गम अंचलों में चार दशकों से अधिक समय से निस्वार्थ सेवा कर रहे पद्मश्री से सम्मानित समाजसेवी चिकित्सक दंपति डॉ. सुनीता गोडबोले और डॉ. रामचंद्र गोडबोले से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के बीच उनके द्वारा किए गए असाधारण मानवीय और सेवा कार्यों की भूरि-भूरि सराहना की।
मुलाकात के दौरान भावुक होते हुए गोडबोले दंपति ने मुख्यमंत्री से कहा, “बस्तर और बस्तरवासियों से हमें गहरा प्रेम है। हम स्थानीय गोंडी और हल्बी भाषा में ही उनसे संवाद करते हैं, यही हमारी संस्कृति है और अब हम बस्तर छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते।” मुख्यमंत्री ने इस भावना को छत्तीसगढ़ का गौरव बताते हुए कहा कि इनका पद्मश्री सम्मान केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर और जनजातीय समाज का सम्मान है। नक्सलवाद के अत्यंत कठिन और भय के दौर में भी अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कुपोषण, टीबी, मलेरिया, पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ अलख जगाना और शिक्षा व नशामुक्ति पर काम करना इनके अटूट विश्वास को दर्शाता है।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री साय ने वनवासी कल्याण आश्रम से अपने पुराने जुड़ाव का स्मरण करते हुए कहा कि आश्रम के संस्कार ही समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपनत्व और संवेदनशीलता पहुंचाने की नींव तैयार करते हैं। गोडबोले दंपति ने मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान संत गहिरा गुरु के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की तथा सरगुजा अंचल की कैलाश गुफा, वहां संचालित संस्कृत विद्यालय और आश्रम की यात्राओं के अपने आध्यात्मिक अनुभव भी साझा किए। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह अद्भुत है कि गोडबोले दंपति ने न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, जनजातीय जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक विरासत को पूरी तरह आत्मसात कर लिया है।
