बरेली
उत्तर प्रदेश के बरेली में थाना बारादरी क्षेत्र में एक डॉक्टर 7 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रहा। साइबर ठगों ने ऐसा जाल बिछाया कि 50 लाख रुपया ठगा जा सके, लेकिन किसी तरह मामला पुलिस तक पहुंच गया, तब कहीं साइबर ठगी में फंसे डॉक्टर को बचाया जा सका।
पुलिस को दी सूचना
बारादरी थाना प्रभारी निरीक्षक धनंजय पांडे ने बताया कि पुलिस अधीक्षक नगर मानुष पारीक को इमरान खान नामक व्यक्ति ने सूचना दी कि उनके चाचा डॉ. नजबुल हसन निवासी फाईक इन्क्लेव थाना बारादरी बरेली जिनकी डिस्पेन्सरी पुराना शहर में सूफीटोला थाना बारादरी क्षेत्र में है, किसी से मोबाइल से बात हुई और बात करते ही घर पर आए और बैंक आदि कागजात लेकर घरवालों को बिना बताए स्कूटी से कहीं चले गए हैं। फोन करने पर फोन नहीं उठा रहे हैं।
परिजनों से पूछताछ में डिजिटल अरेस्ट की जानकारी हुई
सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक नगर ने प्रभारी निरीक्षक थाना बारादरी बरेली धनंजय पांडे को तत्काल पीड़ित के मोबाइल की लोकेशन ट्रेस करने के लिए कहा। थाना बारादरी पुलिस ने तत्काल प्रभाव से एक्टिव होकर उनके परिजन भतीजे और पुत्री से पूछताछ प्रारम्भ की पूछताछ में यह जानकारी हुई कि डॉ. नजबुल हसन को कहीं से फोन आया था। उनको बताया गया था कि उनका आधार कार्ड हवाला में लेन-देन में प्रयोग हुआ है। पूछताछ से यह आशंका प्रतीत हुई कि सम्बन्धित व्यक्ति को कहीं साइबर अपराधियो द्वारा डिजिटल अरेस्ट तो नहीं कर लिया गया है।
सर्विलांस से निकाली गई लोकेशन
प्रारंभिक जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने मोबाइल नम्बर को सर्विलांस पर लगाकर लोकेशन निकाली। लोकेशन होटल कन्ट्री इन पीलीभीत बाईपास रोड के आसपास मिली। वहां पर तलाश करने पर उनकी मोटरसाइकिल कन्ट्री इन होटल के बाहर पार्क मिली। होटल में पूछताछ की गई तो पाया गया कि डा. नजबुल हसन द्वारा सोमवार तक के लिए कमरा बुक कराया गया है। जिसका रूम नंबर-105 है।
झूठी सूचना फैलाकर खुलवाया गया दरवाजा
होटल स्टाफ को लेकर कमरे को खुलवाने का प्रयास किया गया। दरवाजे से कान लगाकर सुना गया तो पाया गया कि कोई व्यक्ति इन्हें वीडियो कॉल पर निर्देश दे रहा है कि दरवाजा मत खोलना बता दो मैं बहुत व्यस्त हूं। मुझे किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। मास्टर चाबी से भी दरवाजा खोलने का प्रयास किया गया, लेकिन सेंसर ओपन होने के बाद भी सिटिकिनी बन्द होने के कारण दरवाजा नहीं खुला, तब आग लगने की झूठी सूचना फैलाकर काफी प्रयास के बाद दरवाजा खोला गया। डॉ. नजबुल हसन साइबर अपराधी चंगुल में डिजिटल अरेस्ट पाए गए, जिन्हें सोमवार तक के लिए डिजिटल अरेस्ट किया गया था।
असली पुलिस को गलत मान रहा था पीड़ित
साइबर ठगों ने डॉ. नजबुल हसन का ब्रेनवास इस तरह कर रखा था कि असली पुलिस की बातों को ही गलत मान रहे थे। साइबर अपराधी की बात को सही मान रहे थे, तब तक मौके पर पुलिस अधीक्षक नगर भी आ गए। डॉ. नजबुल हसन से पूछताछ में बताया कि शनिवार दोपहर में उन्हें एक फोन आया और बताया गया कि आपका आधार कार्ड मुंबई में हवाला कारोबार में नरेश गोयल और उसके पार्टनर ने प्रयोग कर कई राज्यों में घोटाला किया है। जिसकी जांच आरबीआई और सीबीआई कर रही है। अगर तुम उसमें फंसना नहीं चाहते हो, तत्काल अपनी पासबुक और अन्य रिकार्ड लेकर कहीं पर होटल में 3 दिन के लिए शिफ्ट हो जाओ, फोन मत काटना, तुम्हारे घर के पास सीबीआई पहुंच गई है। जो तुम पर नजर रख रही है। यह बात किसी से मत बताना और जो कहा जाए उसे फॉलो करना।
पुलिस ने बचाए 50 लाख रुपये
ठगों के दिए गए निर्देशों के अनुसार डॉक्टर कार्य कर रहे थे। पीड़ित डॉक्टर ने बताया कि यहां होटल में कमरा लेकर करीब 3 घण्टे से हूं। अब तक मैंने उनके बताए अनुसार अपने तीन बैंक खातों की डिटेल उन्हें नोट कराई है, जिसमें लगभग 50 लाख रुपये धनराशि है। उनके द्वारा अब एक मैसेज डालकर बैंक का आईएफसी कोड और डिजिटल कोड पूछा जा रहा था, जिसे मैं अब बताने वाला ही था कि पुलिस ने दरवाजा खुलवा दिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 7 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रहे व्यक्ति को लुटने से बचाया गया और उसके बैंकों में जमा 50 लाख रुपया सुरक्षित कराया गया।
