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पंजाब विधानसभा में हाईवोल्टेज ड्रामा: नरम व्यवहार के बाद CM मान और विपक्ष में तीखी झड़प, एल्कोमीटर टेस्ट की उठी मांग

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चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में शुक्रवार को उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान का व्यवहार चर्चा का विषय बन गया। सदन में मुख्यमंत्री ने पहले तो विपक्ष के प्रति अप्रत्याशित रूप से नरम रुख अपनाया, लेकिन कुछ ही देर बाद माहौल इतना गरमाया कि विपक्ष ने सीएम पर गंभीर आरोप लगाते हुए सदन का दरवाजा बंद कर सभी विधायकों के ‘एल्कोमीटर टेस्ट’ कराने की मांग कर डाली। मजदूर दिवस पर बुलाए गए इस सत्र की शुरुआत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सबको चौंका दिया।

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा को ‘सीनियर’ कहकर संबोधित किया और पंजाब के मजदूरों के कल्याण के लिए उनका सहयोग मांगा। इतना ही नहीं, जब स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने चर्चा के लिए समय तय किया, तो मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आवंटित 8 मिनट के समय को बढ़ाकर 20 मिनट करने की सिफारिश कर दी। इस पर स्पीकर ने चुटकी लेते हुए कहा कि आज सदन के नेता विपक्ष पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं।

शांतिपूर्ण दिख रहा माहौल तब बदल गया जब कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा और मुख्यमंत्री के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। मुख्यमंत्री ने खैहरा के बैठने के तरीके और सदन में फोन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। बहस के दौरान मुख्यमंत्री भावुक हो गए और कहा, “खैहरा मेरी बेटी के बारे में अपशब्द बोलता है।

इसका विधानसभा के खर्च पर इलाज करवाया जाना चाहिए।” इस दौरान मान ने सदन की गरिमा और प्रोटोकॉल का मुद्दा भी उठाया। विवाद तब चरम पर पहुँच गया जब सुखपाल खैहरा ने मुख्यमंत्री के आचरण पर आपत्तिजनक आरोप लगाए। इसके जवाब में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सदन का दरवाजा बंद करने और वहां मौजूद मंत्रियों व विधायकों का ‘एल्कोमीटर टेस्ट’ (नशे की जांच) कराने की मांग कर दी। इस मांग के बाद सदन में भारी हंगामा हुआ और कांग्रेस विधायक वेल में पहुँच गए।

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