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हरियाणा में इन 49 सीटों ने कैसे बदला पूरा चुनावी खेल? कांग्रेस ने गंवाई तो BJP ने तीसरी बार हासिल की सत्ता

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नई दिल्ली

हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 48 सीटें जीत ली हैं और कांग्रेस के हिस्से में 37 सीटें आई हैं। बीजेपी ने इतिहास यह भी रचा कि कोई पार्टी तीसरी बार हरियाणा में बहुमत के साथ सरकार बना रही है। 90 सीटों वाली विधानसभा में एक तरफ जहां बीजेपी और कांग्रेस बराबर सीटें सेफ करके रखी है, तो वहीं हासिल करने के मामले में पार्टी कांग्रेस से आगे रही है। इसके चलते बीजेपी का ग्राफ 48 तक चला गया।

दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा विधानसभा सीटों पर अदला बदली का खेल हुआ है, जिनमें से बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही 22-22 सीटें जीतीं। ये वो सीटें हैं, जो पिछले 20219 के चुनाव में दोनों ही राजनीतिक दलों ने खो दी थीं। इसके अलावा अन्य 5 सीटों में से दो इनेलो और तीन निर्दलीय प्रत्याशियों के पास चली गईं।

BJP ने कांग्रेस से छीनी ज्यादा सीटें
2019 के विधानसभा चुनावों में 22 सीटों पर निर्दलीय या क्षेत्रीय राजनीतिक दल जीते थे। कांग्रेस ने इन 22 सीटों में से 10 सीटें हासिल कीं, इसके अलावा अन्य 12 सीटें बीजेपी से छीनीं, जबकि बीजेपी ने 12 के बदले कांग्रेस से 14 सीटें छीनकर अपनी झोली में डाल लीं।

साल 2019 यानी पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 40 सीटें जीती थीं, जिनमें से पार्टी ने 26 यानी 65% सीटें बरकरार रखीं। वहीं, कांग्रेस ने उस चुनाव में 31 सीटें जीती थीं, लेकिन वह केवल 15 सीट ही रिटेन कर पाई। सीटों को रिटेन करने या सीटिंग विधायकों की जीत में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 48 परसेंट रहा और यहीं बीजेपी के लिए सबसे बड़ा फायदा बना।

जेजेपी का हुआ बुरा हाल
इस चुनाव में सबसे ज्यादा हैरान जेजेपी यानी जननायक जनता पार्टी ने किया, जिसने 2019 के विधानसभा चुनावों में 10 सीटें जीती थीं और सरकार बनाने के लिए बीजेपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन किया था। खुद पार्टी प्रमुख दु्ष्यंत चौटाला डिप्टी सीएम भी बने थे। वही जेजेपी इस चुनाव में अपना खाता तक नहीं खोल सकी।

दुष्यंत चौटाला खुद अपनी सीट उचाना कलां से चुनाव हार गए। कांग्रेस ने जेजेपी की छह सीटें जीतीं। इनमें जुलाना भी शामिल है, जहां से ओलंपियन पहलवान विनेश फोगट ने अपने राजनीतिक अखाड़े में कदम रखा था। वहीं जेजेपी के हिस्से की अन्य चार सीटें बीजेपी ने अपने नाम कर ली थीं।

इनेलो ने गंवाई एक सीट, बसपा खाली हाथ
2019 के विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल ने एक सीट जीती थीं लेकिन इस बार पार्टी ने दो सीटें जीतीं। दिलचस्प बात यह भी है कि इनेलो ने पिछली बार जीती हुई ऐलानाबाद की सीट खो दी, जो पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की सीट थी, क्योंकि यहां से पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला के बेटे और सीटिंग विधायक अभय चौटाला चुनाव लड़ रहे थे।

यह सीट कांग्रेस ने 15000 वोटों के अंतर से जीत ली। इनेलो ने जाट-दलित गठबंधन बनाने की असफल कोशिश में मायावती के नेतृत्व वाली बसपा के साथ गठबंधन करके ये चुनाव लड़ा लेकिन पार्टी को कोई खास सफलता नहीं मिली। बसपा कोई भी सीट जीतने में असमर्थ रही और मायावती ने संकेत दिया कि जाट समुदाय का “दलित विरोधी” पूर्वाग्रह इसके लिए जिम्मेदार था।

बीजेपी ने निर्दलीयों से भी छीनी सीटें
कांग्रेस ने एक सीट सिरसा की जीती, जो 2019 में गोपाल कांडा के नेतृत्व वाली हरियाणा लोकहित पार्टी (एचएलपी) ने जीती थी, उन्हें इस बार बीजेपी का समर्थन हासिल बीजेपी का समर्थन प्राप्त था। 2019 में कांग्रेस सिरसा में चौथे स्थान पर रही थी, जिसे एचएलपी ने सिर्फ़ 602 वोटों से जीता था। 2019 में निर्दलीयों ने जो सात सीटें जीती थीं, उनमें से भाजपा ने 4, कांग्रेस ने दो और इनेलो ने एक सीट जीती।

नया सदन ग्रैंड ट्रंक रोड बेल्ट, यादव बेल्ट, दक्षिणी हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बीजेपी की मजबूत पकड़ को भी दर्शाता है। हालांकि, कांग्रेस पंजाब की सीमा से लगी सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रही। कांग्रेस ने एक सीट सिरसा की जीती, जो 2019 में गोपाल कांडा के नेतृत्व वाली हरियाणा लोकहित पार्टी (एचएलपी) ने जीती थी, उन्हें इस बार बीजेपी का समर्थन हासिल बीजेपी का समर्थन प्राप्त था। 2019 में कांग्रेस सिरसा में चौथे स्थान पर रही थी, जिसे एचएलपी ने सिर्फ़ 602 वोटों से जीता था।

2019 में निर्दलीयों ने जो सात सीटें जीती थीं, उनमें से भाजपा ने 4, कांग्रेस ने दो और इनेलो ने एक सीट जीती। नई विधानसभा में ग्रैंड ट्रंक रोड बेल्ट, यादव बेल्ट, दक्षिणी हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बीजेपी की मजबूत पकड़ को भी दर्शाता है। हालांकि, कांग्रेस पंजाब की सीमा से लगी सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रही।

मध्य हरियाणा और अन्य जाट-बहुल क्षेत्रों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही सीटें जीतने में सफल रहीं। इस साल बीजेपी ने जो 22 सीटें जीतीं, जो 2019 में नहीं जीत पाई थीं, उनमें से छह जाट बेल्ट में आती हैं, जिनमें गोहाना, खरखौदा, सफीदों, सोनीपत, दादरी और उचाना कलां शामिल हैं।

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