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तेजस्वी से नहीं मिली जगदानंद की ताल, 3 बात से सुधाकर के पापा हैं लाल

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पटना

राष्ट्रीय जनता दल के फिर से बिहार प्रदेश अध्यक्ष बने जगदानंद सिंह को लेकर चर्चा बहुत तेज है कि कृषि मंत्री रहे बेटे सुधाकर सिंह के इस्तीफे के बाद वो भी पार्टी का पद छोड़ सकते हैं। जगदानंद सिंह आरजेडी की राष्ट्रीय परिषद मीटिंग के लिए दिल्ली जा रहे हैं जहां वो लालू यादव से मिलेंगे। जगदानंद सिंह लालू यादव के जमाने के नेता हैं और लंबे समय से उनके सहयोगी और मित्र रहे हैं।

नीतीश के साथ सरकार बनाना भी जगदानंद सिंह को पसंद नहीं था लेकिन लालू ने मनाया। दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए भी लालू ने बनाया। लेकिन अब हाल ये है कि तेजस्वी यादव से जगदानंद सिंह की ताल मिल नहीं रही है और बेटे की तरफ झुक रहे लालू यादव के रवैए से जगदानंद सिंह लालू पर भी लाल हैं। ना चाहते हुए भी जगदानंद सिंह लालू के कहने पर नीतीश के साथ सरकार बनाने को राजी हो गए लेकिन तब से तीन ऐसी बात हुई है जिससे अब उनका मूड बिगड़ गया सा दिख रहा है।

सबसे पहला तो वो लालू और तेजस्वी से इसलिए नाराज हैं कि दोनों ने उनके बेटे सुधाकर सिंह का पक्ष नहीं लिया। जगदानंद चाहते थे कि सुधाकर सिंह ने बतौर कृषि मंत्री जो भ्रष्टाचार का सवाल उठाया, या मंडी की बहाली के लिए एपीएमसी कानून लागू करने की बात उठाई या फिर कृषि रोड मैप की कामयाबी पर जो सवाल उठाए, उसमें पार्टी उनका साथ देती। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सरकार इन सवालों से असहज हो रही थी क्योंकि विपक्षी बीजेपी को सरकार पर हमला करने के लिए मसाला मिल रहा था।

दूसरा कारण भी बेटे सुधाकर सिंह से ही जुड़ा है। प्रदेश राजद अध्यक्ष जगदानंद सिंह इस बात से भी भड़क गए कि उनके बेटे ने तेजस्वी यादव को इस्तीफा भेजा जिसे तेजस्वी ने नीतीश और नीतीश ने राज्यपाल को भेजकर मंजूर कर लिया। जगदानंद सिंह को उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व सुधाकर से बात करता और मामले का समाधान निकालता लेकिन उसमें मुश्किल ये थी कि समाधान का रास्ता नीतीश के घर से गुजरता जिसमें आरजेडी कोई तनाव नहीं पैदा करना चाहती।

तीसरी बात हो गई जब जगदानंद सिंह ने दावा कर दिया कि नीतीश कुमार 2023 में तेजस्वी यादव को सीएम बना देंगे और खुद केंद्र की राजनीति करेंगे। जगदानंद सिंह ने इस दावे में कहा था कि नीतीश की घोषणा के अनुसार जबकि ऐसी कोई घोषणा नीतीश या उनकी पार्टी या गठबंधन के तरफ से नहीं हुई है। इस मामला के बढ़ने पर खुद तेजस्वी यादव को आगे आकर माहौल शांत करना पड़ा कि उन्हें सीएम बनने की होई हड़बड़ी नहीं है और नीतीश कुमार उनके मुख्यमंत्री हैं जिनके सामने विपक्षी दलों की एकजुटता एक एजेंडा है। तेजस्वी ने पार्टी के नेताओं को झिड़की लगाई थी कि इस तरह की बयानबाजी ना करें।

 

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