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Friday, March 20, 2026
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शराब बैन बढ़िया लेकिन ऐक्शन बहुत खराब, अधिकारी दिमाग ही नहीं लगा रहे: पटना हाई कोर्ट

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पटना

बिहार में शराबबंदी कानून के तहत जब्त किए गए वाहनों की जब्ती या नीलामी पर राज्य के अधिकारी जिस तरह के बेतुके आदेश पारित कर रहे हैं। इससे नाराज पटना उच्च न्यायालय ने सोमवार को मौखिक रूप से टिप्पणी की है कि है कि ‘आबकारी विभाग के अधिकारियों की ओर से शराबबंदी कानून का पालन करने में दिमाग का प्रयोग नहीं किया गया गया है।’ मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड और अन्य की ओर से दायर रिट याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई करते हुए राज्य के आबकारी आयुक्त को शराब अपराधों, सामाजिक प्रोफाइल में की गई गिरफ्तारी पर पिछले तीन महीनों का डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। गिरफ्तार किए गए, जब्त किए गए और छोड़े गए वाहनों की संख्या, विभिन्‍न अधिकारियों के पास लंबित पड़ी है।

अदालत ने अनुभवों के आधार पर जाहिर की नाराजगी
अदालत ने यह भी कहा कि शराबबंदी कानून निस्संदेह बहुत अच्छा है लेकिन इसका कार्यान्वयन खराब तरीके से हो रहा है। जिसे बिना दिमाग लगाए लागू किया जा रहा है। अदालत ने आबकारी आयुक्त को एक सप्ताह के भीतर ऐसे सभी डेटा अपलोड करने का निर्देश दिए हैं। अदालत ने अपने अनुभव का हवाला देते हुए इस पर अपनी खीज जाहिर की। उन्‍होंने कहा कि कहा कि आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से जब्ती के मामलों को निपटाने के तरीके वादियों ने भी झुंझलाहट व्यक्त की है। इस झुंझलाहट में वादियों ने हाई कोर्ट से संपर्क किया था। क्योंकि जब्ती के खिलाफ अपील की सुनवाई करने वाले बेहतर मंचों ने कलेक्टर के आदेश को बिना दिमाग लगाए शब्दशः पालन किया। .

कट, कॉपी, पेस्‍ट के आधार कानून के पालन से हाई कोर्ट का दबाव बढ़ाया
चीफ जस्टिस की ओर से यह टिप्‍पणी की गई कि आदेश को बिना दिमाग लगाए केवल कट कॉपी पेस्‍ट किया गया। उन्‍होंने पाया कि अपील सुनने वाले अधिकारियों ने कलेक्टर द्वारा पारित आदेशों से बस कट, कॉपी और पेस्ट किया था। उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकारियों की ओर से इस तरह से बिना दिमाग का उपयोग किए शराबबंदी कानून को कट कॉपी पेस्‍ट के आधार पर लागू करने से हाई कोर्ट पर अनावश्यक दबाव बढ़ गया। जो अधिकारी स्वतंत्र दिमाग से निर्णय लेना नहीं जानते हैं, उन्हें बिहार न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षित होने की आवश्यकता है।

सीजे ने पूछा सवाल, ऐसी गलतियों को जायज कैसे ठहराया जा सकता है
चीफ जस्टिस ने पूछा कि महज डेढ़ लीटर शराब की जब्ती के बाद एक साल से अधिक समय तक शराबबंदी कानून के तहत घरों को सील करने को वरिष्ठ अधिकारी कैसे जायज ठहरा रहे हैं? उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई कलेक्टर इस तरह के तथ्य की सराहना करने में गलती करता है, तो उसके वरिष्ठ अधिकारी अपीलीय मंच पर बैठकर इसकी पुष्टि कैसे कर सकते हैं? खंडपीठ ने राज्य की मुकदमेबाजी नीति का पालन करने में अधिकारियों के उदासीन रवैये पर तंज कसा है।

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