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पंकजा मुंडे को मिलेगा ‘पनौती’ वाला बंगला, बावनकुले को हुआ था एलॉट, रामटेक की चर्चा क्यों?

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मुंबई

महायुति के मंत्रियों को उनके विभागों के आंवटन के बाद सरकार ने सभी को मंत्रालय इमारत में बने केबिन और मुंबई में रहने के लिए सरकारी बंगले आवंटित कर दिए। राजस्व मंत्री बनाए गए बीजेपी अध्यक्ष चन्द्रशेखर बावनकुले को रामटेक बंगला दिया गया। यह बंगला अशुभ माना जाता है। इस बंगले में रहने वाले मंत्रियों के राजनीतिक करियर में काफी उथल-पुथल होती रहती है। इसलिए बावनकुले को रामटेक बंगला मिलने के बाद उनके कार्यकर्ता डर गए। लेकिन अब यह बात सामने आई है कि पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे इस बंगले में रहेंगी।

कहां पर है रामटेक बंगला?
दरअसल मालाबार हिल में रामटेक बंगला बहुत बड़ा है। इस बंगले से समुद्र का खूबसूरत नजारा दिखता है। राजस्व मंत्री बने चन्द्रशेखर बावनकुले को रामटेक बंगला दिया गया। वहीं पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे को पर्णकुटी बंगला दिया गया। लेकिन उनको इस बंगले को बदलकर रामटेक बंगला दे दिया गया। ऐसे में जहां बावनकुले के कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली। वहीं अब पंकजा मुंडे के कार्यकर्ताओं में डर बढ़ गया है।

रामटेक बंगले में कौन रहा?
जब राज्य में पहली बार कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार बनी थी तब छगन भुजबल रामटेक बंगले में रह रहे थे। उस वक्त उन पर तेलगी मामले में गंभीर आरोप लगे थे। स्टांप पेपर घोटाले के कारण भुजबल को इस्तीफा देना पड़ा था। वह समय भुजबल के लिए बहुत कठिन था। 2014 में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन राज्य में सत्ता में आया। तब बीजेपी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे रामटेक के रहवासी बने। उन्हें सरकार में दूसरे नंबर पर रखा गया था। लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उसके बाद से इस बंगले से मानो राजनीतिक वनवास ही हो गया हो।

रामटेक बंगले को क्यों मानते हैं अशुभ?
2019 में राज्य में महाविकास अघाड़ी की सरकार आई। छगन भुजबल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बने। लेकिन वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। ढाई साल में सरकार गिर गई। इस दौरान भुजबल का प्रवास रामटेक में था। ठाकरे सरकार के पतन के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बीजेपी और शिवसेना की सरकारें आईं। इस सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री बने दीपक केसरकर को रामटेक बंगला मिला। विधानसभा चुनाव के बाद फिर से महायुति की सरकार आई। लेकिन केसरकर को अपना मंत्रालय गंवाना पड़ा। इसलिए रामटेक बंगला अशुभ माना जाता है।

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