चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में मंगलवार (28 अप्रैल) को हुई कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। पंजाब सरकार ने आगामी 1 मई को ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह एक दिवसीय सत्र देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले मेहनतकश मजदूरों और श्रमिकों के सम्मान में समर्पित होगा।
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि विधानसभा के इस विशेष सत्र में मजदूर यूनियनों के प्रतिनिधियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। ऐसा पहली बार हो रहा है जब सदन की कार्यवाही में श्रमिक वर्ग की सीधी भागीदारी और उनके सम्मान को केंद्र में रखा गया है। मुख्यमंत्री मान के अनुसार, यह कदम राज्य के विकास में श्रमिकों के योगदान को आधिकारिक पहचान देने का एक प्रयास है। सत्र के दौरान श्रमिक वर्ग से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर विमर्श किया जाएगा। विशेष रूप से मनरेगा योजना में हाल ही में हुए बदलावों और उनके मजदूरों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा होगी।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रमिक वर्ग के सामने आ रही चुनौतियों और उनके समाधान पर भी सदन में विचार-मंथन किया जाएगा। विशेष सत्र के दौरान केवल चर्चा ही नहीं, बल्कि राज्य के विकास से जुड़े अन्य जरूरी विधायी कार्यों को भी निपटाया जाएगा। विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति (BAC) द्वारा तय किए गए एजेंडे के अनुसार महत्वपूर्ण प्रस्तावों और कानूनों पर निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस सत्र को लोकतंत्र की मजबूती और श्रमिक वर्ग के सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
