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13 साल के छात्र से प्रेग्नेंट हुई शिक्षिका को मिली बेल, गुजरात की पॉस्को कोर्ट ने लगाई कड़ी शर्तें

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अहमदाबाद/सूरत:

गुजरात के सूरत शहर में 13 साल के बच्चे भगा ले जाने वाली शिक्षिका को कोर्ट ने जमानत दे दी है। इस पूरे मामले में किडनैपिंग का केस दर्ज होने पर 23 साल की शिक्षिका ने बच्चे से यौन संबंध होने का दावा किया था। मेडिकल जांच में शिक्षिका प्रेग्नेंट पाई गई थी। शिक्षिका ने हिरासत में रहते हुए कोर्ट की मंजूरी के बाद गर्भपात कराया था। अब कोर्ट ने शिक्षिका को जमानत दी है लेकिन उसके ऊपर एक बड़ी शर्त लगाई है। कोर्ट ने कहा कि वह नाबालिग बच्चे के दूर रहेगी। कोर्ट ने कहा है महिला शिक्षक ट्रायल पूरा होने तक पीड़ित छात्र के घर से 1000 मीटर के दायरे में प्रवेश नहीं करेगी। पॉस्को कोर्ट ने विस्तृत ऑर्डर में इन शर्तों का उल्लेख किया है।

क्या था पूरा ममला?
सूरत में इस महीने की शुरुआत में यह हैरान कर देने वाली घटना सामने आई थी। जब शहर के पूना इलाके में रहने वाली एक 23 साल की ट्यूशन टीचर 13 साल के छात्र को भगा ले गई थी। छात्र के घर नहीं लौटने पर परिवार ने गुमशुदगी की सूचना देने के बाद किडनैपिंग का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने टीचर को छात्र के साथ चार दिन बार अरेस्ट किया था। तब शिक्षिका ने कहा था कि गर्भवती है। इसी के चलते वह स्टूडेंट को लेकर भागी थी। शिक्षिका को गर्भपात कराने के बाद भ्रूण के सैंपल डीएनए जांच को भेज गए हैं। इसमें शिक्षिका के दावे की पुष्टि होगी, हालांकि पुलिस की पूछताछ में छात्र ने भी संबंध बनाने की बात कबूल की थी। पुलिस ने इस मामले में टीचर के खिलाफ नाबालिग का अपहरण करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया था। अब पोक्सो की धारा 4, 8, 12 भी जोड़ थी।

पॉक्सो कोर्ट ने क्या कुछ कहा?
सूरत कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश रजनीकांत भट्ट की अदालत ने आरोपी शिक्षक को जमानत दी। कोर्ट ने शिक्षिका को तीन दिन के अंदर अपना स्थायी पता और मोबाइल नंबर सभी जानकारी थाने में जमा कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आरोपी किसी भी गवाह को प्रभावित या डरा नहीं सकेगी। बचाव पक्ष की ओर से वकील वाजिद शेख ने दलील दी कि पुलिस ने शिकायत दर्ज करते समय गलती की है। इस मामले में पॉक्सो एक्ट की धाराएं लागू नहीं होती हैं, फिर भी उन्हें लगाया गया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को देखकर ऐसा लगता है कि आरोपी के खिलाफ जांच लगभग पूरी हो चुकी है। आरोपी का पहले ही गर्भपात हो चुका है और जरूरी सबूत भी जुटाए जा चुके हैं। दोनों ने अपनी मर्जी से संबंध बनाए हैं।

झूठे मामले में फंसाया: वकील
बचाव पक्ष ने दलील दी कि पोक्सो एक्ट की धाराएं 4, 6, 8 और 12 महिलाओं पर लागू नहीं होती हैं। इसके अलावा, इस मामले में अपहरण की धारा भी लागू नहीं होती है, क्योंकि आरोपी और किशोर को सार्वजनिक स्थानों पर एक साथ घूमते देखा गया था। आरोपी को झूठे मामले में फंसाया गया है। इसके अलावा, आरोपी का पहले ही गर्भपात हो चुका है और उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति नाजुक और संवेदनशील है।

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