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कुदरत का कहर: डूबने की कगार पर सपनों का आशियाना, पलायन को मजबूर हुए हजारों लोग

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पटना,

इन दिनों हर तरफ पानी का कहर देखने को मिल रहा है. बारिश और बाढ़ के चलते गांवों में चारों तरफ सिर्फ पानी ही नजर आता है. जिसके चलते लोग अपने घरों को छोड़ने को मजबूर हैं. ऐसा ही कुछ मंजर बिहार में भी देखने को मिल रहा है. जहां बगहा के ठकराहा प्रखंड के मोतीपुर पंचायत के हरखटोला, शिवपुर और मुशहरी मिश्र टोला के लोगों के चेहरे पर गंडक नदी की तबाही का डर और तिनका-तिनका जोड़कर बना आशियाना छोड़ने का भय साफ नजर आ रहा है. कारण, ये गांव गंडक नदी की कटाव में विलीन होने वाले हैं. नदी की धारा घर के पास बिल्कुल बीस मीटर की दूरी तक पहुंच गई है. जान की खातिर लोग गांव खाली कर अपना आशियाना छोड़कर जा रहे हैं. प्रशासन से गुहार लगाना ग्रामीणों के काम नहीं आया, अब वर्षों से एक जगह रहने वाले लोग अपना ठिकाना बदल रहे हैं.

ठकराहा प्रखंड के गांव के लोग अपना सारा सामान ट्रैक्टर और बैलगाड़ी पर लेकर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं. हजारों की ये आबादी कहां शरण लेगी, कोई बताने को तैयार नहीं है. ग्रामीणों ने बड़ी मेहनत से अपने खेतों में गन्ना व धान की फसल लगाई थी. लेकिन सभी फसल सहित भूमि नदी में विलीन हो गई. घर भी नदी के कटाव में बहने वाले हैं. नदी की इतनी भयावह स्थिति है कि घर की महिला व छोटे-छोटे बच्चे रात भर सो नहीं पाए और खौफ में पूरी रात जागकर ही बिताई. वहीं सुबह होते ही गांव के सभी परिवारों के लोग अपने-अपने ट्रेक्टर-ट्रॉली और बैलगाड़ी पर सामान लादकर पलायन करने की तैयारी में जुट गए.

500 एकड़ फसल नदी में विलीन
पलायन करने वाले पीड़ित परिवारों की मानें तो एक महीने से नदी गांव के सामने कटाव कर रही है. लेकिन जल संसाधन विभाग निरीक्षण से आगे नहीं बढ सका. इस गांव के लोगों की लगभग 500 एकड़ फसल सहित भूमि नदी में विलीन होने के बाद अब गांव भी नदी में विलीन होने की कगार पर है. पलायन करने वाले लोग खाने तक के लिए मोहताज हैं. वहीं स्थानीय विधायक का कहीं अता पता नहीं है. जिसके चलते ग्रामीण काफी नाराज हैं.

जदयू विधायक की प्रशासन को चेतावनी
वाल्मीकिनगर के जदयू विधायक धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह का कहना है कि कटाव की समस्या को प्रशासनिक स्तर से लेकर जल संसाधन विभाग तक को अवगत कराया गया है. जल संसाधन विभाग की टीम ने भी गांव में पहुंचकर कटाव की भयावह स्थिति को देखा है. लेकिन अभी तक इस पर काम शुरू नहीं किया जा सका है. सरकार इस पर जल्द ध्यान नहीं देती है तो हम ग्रामीणों के साथ धरना पर बैठेंगे.

अधिकारियों ने सलाह देकर झाड़ा पल्ला
सीओ ठकराहा राहुल कुमार का कहना है कि अभी आपदा प्रबंधन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है. पलायन करने वाले लोगों को मोतीपुर स्थित बाढ़ आश्रय स्थल एवं बांध एवं ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है. दूसरी ओर जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार ने बताया कि दो दिन पहले कटाव का जायजा लिया गया था. लेकिन नदी का जल स्तर बढ़ने के कारण जल स्तर कम होने के बाद कटाव रोधी कार्य कराने का निर्णय लिया गया था. इसी बीच लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया.

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