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महाराष्ट्र में चाचा-भतीजे होंगे एक, सुप्रिया सुले बनेंगी केंद्र में मंत्री! जानें क्या है तैयारी?

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मुंबई

महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट से चौथी बार जीती शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले क्या केंद्र में मंत्री बनेगी? राज्य की राजनीति में पवार फैमिली क एक होने की अटकलों के बीच यह सवाल चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अजित पवार की मां आशाताई पवार ने पिछले दिनों साफ कहा था कि वह चाहती हैं कि पवार परिवार एक हो जाए। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि एनसीपी के दोनों धड़ों के साथ आने की कवायद पर्दे के पीछे जारी है। अगर यह कोशिश परवान चढ़ती है तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बन सकती हैं। इतना ही नहीं उन्हें कोई बड़ा मंत्रालय भी मिल सकता है।

उद्योगपति के बीच में होने की चर्चा
पिछले दिनों यह चर्चा सामने आई थी। राज्य के एक बड़े उद्योगपति की इच्छा के अनुसार एक ही परिवार के दो प्रतिद्वंदी पाटियों को जोड़ने की कवायद चल रही है। चर्चा यह भी है कि ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार की नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू पर निर्भरता कम हो जाएगी, क्यों शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के पास आठ सांसद हैं, हालांकि अजित पवार की मां आशाताई पवार ने परिवार के एकजुट होने की बात कही थी तब उन्होंने कहा था कि अजित पवार जब तक बीजेपी के साथ हैं तब तक कुछ नहीं हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि अजित पवार और शरद पवार का मिलन थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन असंभव नहीं है। लोकसभा चुनावों में अजित पवार की पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाई थी। जबकि शरद पवार को 10 सीटों पर लड़ने के बाद आठ पर जीत मिली थी।

सुप्रिया सुले ने की थी तारीफ
पिछले दिनों जब शिवसेना यूबीटी के मुखपत्र सामना में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ करते हुए उन्हें देवाभाऊ लिखा गया था। उसके बाद सुप्रिया सुले ने देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की थी। सुले ने यहां तक कह दिया था कि वह इकलौते ऐसे व्यक्ति हैं तो जो राज्य में सक्रिय हैं। सुले ने कहा था कि एनसीपी के दिवंगत नेता और पूर्व गृह मंत्री आर आर पाटिल भी गढ़िचरौली जाते हैं। ऐसे में फडणवीस का गढ़चिरौली जाना एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा था कि नक्सलवाद खत्म हो। यह कौन नहीं चाहता है। राजनीतिक हलकों में सुले के इस बयान नए राजनीतिक बनने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

पवार के सामने है कठिन चुनौती
अगर पवार बीजेपी के साथ आते हैं तो उनके फिर से राज्यसभा जाने का रास्ता साफ हो जाएगा। इतना ही नहीं विधानसभा चुनावों अजित पवार की पार्टी को अधिक सीटें मिलने के बाद शरद खेमा काफी दबाव में है। चर्चा यहां तक है कि अगर पवार कोई अच्छी स्थिति का निर्माण नहीं करते हैं तो उनकी अगुवाई वाली एनसीपी फिर से टूट सकती है। एनसीपी के दोनों धड़ों के पास राज्य में 20 फीसदी जितने वोट हैं। शरद पवार खेमे के लिए अगले पांच साल तक बगैर सत्ता के रहना काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

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