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Wednesday, April 1, 2026
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UP : ‘मर भी जाएं, तो हमें खबर न करना..’, परिवार ने छोड़ा बुजुर्ग का साथ, आखिरी समय में वृद्धाश्रम बना सहारा

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गाजीपुर

यह दास्तान उस कड़वी सच्चाई को बयां करती हैं, जहां खून के रिश्ते भी स्वार्थ के सामने फीके पड़ जाते हैं। जो मां-बाप अपने पूरे जीवन में बच्चों को बड़े लाड प्यार से पालते हैं, पढ़ाते हैं, उनको जीवन में एक अच्छा इंसान बनाने के लिए अच्छे संस्कार सीखाते हैं। बच्चों की हर मांग को जीवन भर पूरा करते हैं। लेकिन वही बच्चे बड़े होते ही उनको अपने से अलग करने में लग जाते हैं। इस कलियुगी दुनिया में बच्चों द्वारा बूढ़े माता-पिता के साथ जिस तरीके का बर्ताव किया जा रहा है, और जिन घटनाओं का सामना किया जा रहा है।

कुछ ऐसा ही वाक्या उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सामने आया है जहां वृद्ध गौरी शंकर गुप्ता पर उनके बच्चों द्वारा उत्पीड़न किया गया और अब बीते रविवार को उन्होनें एक वृद्धाश्रम में आखिरी सांस ली।

बता दें, गाजीपुर में कासिमाबाद क्षेत्र के निवासी गौरी शंकर गुप्ता की जिंदगी मेहनत और संघर्ष की कहानी थी। लेकिन बुढ़ापे में जब ताकत जवाब दे गई, वो असहाय हो गए, तो अपने ही परिवार ने उन्हें दरकिनार कर दिया। जहां उनके बेटे-बहू ने उन्हें घर से तो निकाला ही उनकी पत्नी ने भी उनका साथ नही दिया। उनके घर से लेकर ससुराल तक में कोई भी सहारा देने वाला नहीं मिला। जीवन से थक हारकर आखिरकार, 2019 में गौरी शंकर को वृद्धाश्रम में शरण लेनी पड़ी। जहां उन्होंने अपने जीवन के अंतिम छह साल बिताए। और बीते रविवार देर शाम उन्होंने वृद्धाश्रम में आखिरी सांस लेते हुए इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

गौरी शंकर गुप्ता का अंतिम समय में कोई साथ देने वाला नहीं था। मृत्यु की सूचना मिलने पर सिर्फ उनका साला पहुंचा, जिसने बताया कि गौरी शंकर की पत्नी पांच दिन पहले मायके आई थीं और कह गई थीं कि ‘अगर वे मर भी जाएं, तो हमें खबर न करना।’

गौरी शंकर गुप्ता के अंतिम संस्कार के समय उनका बेटा, बहू या अन्य रिश्तेदारों में से कोई भी सामने नहीं आया। वृद्धाश्रम की संरक्षिका ज्योत्सना सिंह और वहां रहने वाली वृद्ध महिलाओं ने गौरी शंकर को अंतिम संस्कार में कंधा दिया और विधि-विधान से उनकी अंतिम यात्रा पूरी की। वृद्धाश्रम के लोगों ने ही उनके आखिरी समय में उनकी देखभाल की।

समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित वृद्धाश्रम में 58 बुजुर्ग रहते हैं। ज्योत्सना सिंह और उनका स्टाफ इन बुजुर्गों की सेवा करते हैं। सोमवार सुबह करीब 9 बजे ज्योत्सना ने बताया कि कासिमाबाद क्षेत्र के निवासी गौरी शंकर गुप्ता का अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक कर दिया गया।

यह कहानी दिल को छूती है और सवाल उठाती है कि क्या बुजुर्ग माता-पिता सिर्फ बोझ हैं, जिन्हें अपनाने से लोग कतराते हैं? या परिवार की असली परिभाषा वही है, जो आखिरी वक्त में साथ दे? यह घटना परिवार की बेरुखी और वृद्धाश्रम की ममता के बीच का अंतर साफ दर्शाती है।

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