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Tuesday, March 24, 2026
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‘शिवलिंग’ की कार्बन डेटिंग पर वाराणसी कोर्ट में टला फैसला, 11 अक्टूबर को अगली सुनवाई

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वाराणसी

ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी विवाद मामले में वाराणसी की अदालत ने शुक्रवार को कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराए जाने का फैसला टाल दिया है। याचिका पर आज कोर्ट को अपना फैसला सुनाना था। हिंदू पक्ष के चार वादियों की तरफ से शिवलिंग के होने और उसकी उम्र का पता लगाए जाने को लेकर याचिका डाली गई थी। इस मामले पर सुनवाई हो चुकी थी और आज कोर्ट को अपना फैसला सुनाना था। हालांकि एक अधिवक्ता की मृत्यु की वजह से फैसला टल गया। अब 11 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी।

वाराणसी कोर्ट रूम के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती रही। हिंदू पक्ष की तरफ से वकील हरिशंकर जैन और विष्णु जैन कोर्ट पहुंच गए। ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के दौरान मस्जिद के वजू खाने में एक शिवलिंग नुमा आकृति मिली थी, जिसे हिंदू पक्ष ने आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग बताया था। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बता रहा था। श्रृंगार गौरी नियमित दर्शन मामले में कुल 5 वादी महिलाएं हैं, जिनमें से चार वादी महिलाओं के वकील विष्णु शंकर जैन ने सर्वे के दौरान वजू खाने में मिले शिवलिंग के कार्बन डेटिंग की मांग के लिए याचिका दी थी।

हालांकि ट्विस्ट तब आ गया, जब हिंदू पक्ष की तरफ से मुख्य वादी राखी सिंह के वकील की तरफ से इसका विरोध किया गया। राखी सिंह के वकील का कहना है कि उसके शिवलिंग नहीं होने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। शिवलिंग था, है और रहेगा। किसी तरह की वैज्ञानिक जांच कराए जाने की जरूरत नहीं है। कार्बन डेटिंग कराकर शिवलिंग होने के प्रति अविश्वास पैदा किया जा रहा है।

मुस्लिम पक्ष की तरफ से भी कार्बन डेटिंग का विरोध किया गया था। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी की तरफ से विरोध जताते हुए कहा गया कि कार्बन डेटिंग उन चीजों की होती है जो कार्बन को अवशोषित करे। पेड़-पौधों से लेकर मरे हुए इंसान और जानवर की हड्डियों की जांच की जा सकती है। लेकिन किसी लकड़ी या फिर पत्थर की कार्बन डेटिंग नहीं हो सकती है क्योंकि ये कार्बन को अवशोषित नहीं कर सकते हैं।

इसके साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में मिले शिवलिंग पर पूजन का अधिकार और ज्ञानवापी परिसर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक संबंधी मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी। फास्ट ट्रैक कोर्ट में अगली तारीख मंगलवार तय कर दी गई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के सीनियर डिवीजन जज महेंद्र पांडेय के बेंच ने इस मामले पर अगली तारीख दी है। एक अधिवक्ता की आसमयिक मौत के बाद शुक्रवार को सुनवाई नहीं हो सकी।

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