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Friday, June 19, 2026
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पीड़िता के पिता पहुंचे कलकत्ता हाईकोर्ट, कहा- CBI जांच में हो रही है हीलाहवाली

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कोलकाता:

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ड्यूटी के दौरान बलात्कार और हत्या की शिकार हुई 31 वर्षीय डॉक्टर के माता-पिता ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसमें उन्होंने सीबीआई की जांच पर चिंता जताई है और देश को हिला देने वाले इस मामले में अदालत के हस्तक्षेप की मांग की है। जस्टिस तीर्थंकर घोष की सिंगल जजों की बेंच ने कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है और बेंच इस पर तभी सुनवाई कर सकती है, जब यह साफ हो जाए कि शीर्ष अदालत जांच की निगरानी कर रही है या नहीं। मामले पर अगली सुनवाई 15 जनवरी के आसपास हो सकती है।

हाईकोर्ट में माता-पिता ने क्या कहा?
हाईकोर्ट के सामने अपनी याचिका में डॉक्टर के माता-पिता ने कहा है कि वे बलात्कार-हत्या मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच से व्यथित और असंतुष्ट हैं। माता-पिता ने कहा कि घटना की रात याचिकाकर्ता की बेटी के साथ मौजूद अहम गवाहों को गवाहों की सूची में नहीं रखा गया है और न ही उनसे आज तक पूछताछ की गई है। याचिका में कहा गया है कि पूरी जांच और परीक्षण के उद्देश्य से यह साफ है कि पूरा मुकदमा केवल एक व्यक्ति को फंसाने और निशाना बनाने के लिए चलाया जा रहा है। जिसका नाम संजय रॉय है और अन्य संदिग्धों को बाहर रखा गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट है कि संजय रॉय ही एकमात्र व्यक्ति नहीं हो सकता जिसने अपराध को अंजाम दिया है।

चार्जशीट में देरी
एक सिविल वॉलिंटियर संजय रॉय को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उस पर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया गया था। अदालत के आदेश के बाद जांच का जिम्मा संभालने के बाद उसकी हिरासत सीबीआई को दे दी गई। माता-पिता ने बताया कि सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष और स्थानीय पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अभिजीत मंडल के नाम से सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल नहीं किया है। सीबीआई की ओर से 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करने के बाद घोष और मंडल को 13 दिसंबर को जमानत दे दी गई थी। मंडल बाहर आ गए हैं, जबकि घोष वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जेल में हैं।

जांच में समझौता किया गया
डॉक्टर के माता-पिता ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन उन्होंने दावा किया कि जांच में समझौता किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक आगे की जांच का निर्देश नहीं दिया जाता है, तब तक मामले को तार्किक निष्कर्ष पर नहीं लाया जा सकता है और जांच के तरीके के कारण अन्य संदिग्धों को छुआ नहीं जा सकेगा। एक बार मुकदमा समाप्त हो जाने के बाद याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि न्याय से समझौता हो जाएगा। स्नातकोत्तर प्रशिक्षु 31 वर्षीय डॉक्टर की 9 अगस्त की सुबह आरजी कर अस्पताल के एक सेमिनार कक्ष में बलात्कार और हत्या कर दी गई थी। इस भयावह घटना ने वर्कप्लेस पर महिलाओं की सुरक्षा और ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मजबूत उपायों की आवश्यकता पर देश भर में चर्चा को जन्म दिया।

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