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पश्चिम बंगाल: पत्नी की डिलीवरी में 6 लाख का अस्पताल बिल, क्लेम पर उठे सवाल, फिर सुर्खियों में विधायक

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कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और अभिनेता कंचन मलिक एक बार फिर चर्चा में हैं। मलिक ने अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए अस्पताल का बिल जमा किया है। इससे विवाद खड़ा हो गया है। उत्तरपाड़ा सीट से विधायक कंचन मलिक ने इसी साल फरवरी में श्रीमयी चटर्जी से शादी की थी। 3 नवंबर को उनकी एक बेटी हुई। दक्षिण कोलकाता के एक प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी के लिए कुल 6 लाख रुपये का खर्च आया। विधानसभा सूत्रों के अनुसार, मलिक ने मंगलवार को सभी जरूरी कागजातों के साथ यह बिल विधानसभा के स्वास्थ्य विभाग में जमा किया।

विधायक ने क्या कहा?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले पर जब कंचन मलिक से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आपको बिल के बारे में कहां से पता चला, बाकी जानकारी भी वहीं से ले लीजिये। इस पर विधानसभा अध्यक्ष बिमन बनर्जी ने कहा कि वह सभी दस्तावेजों की जांच करेंगे। मैं मंजूरी देने से पहले व्यक्तिगत रूप से सभी स्वास्थ्य बिलों की जांच करता हूं। उन्होंने कहा कि अगर कोई सवाल उठता है, तो मैं संबंधित अस्पताल को फोन करूंगा और अधिकारियों से बात करूंगा।

अस्पताल का है कुल कितना बिल?
हालांकि TMC के एक अन्य नेता ने कहा कि मलिक ने अभी तक मेडिकल बिल जमा नहीं किया है। उन्होंने कहा क वह सिर्फ बिल के बारे में पूछताछ करने विधानसभा गए थे। अस्पताल ने प्रक्रिया के लिए 2 लाख रुपये और डॉक्टर की फीस के रूप में 4 लाख रुपये लिए थे। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर कोई कह रहा है कि उन्होंने 6 लाख रुपये का मेडिकल बिल जमा किया है।

वाम मोर्चा सरकार में भी हुआ था विवाद
इससे पहले भी मंत्रियों की ओर से विधानसभा में जमा किए गए स्वास्थ्य बिलों को लेकर विवाद हो चुके हैं। वाम मोर्चा सरकार के दौरान मंत्री मानव मुखोपाध्याय को चश्मे के लिए 30,000 रुपये का दावा करने पर विरोध का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्हें आवंटित राशि छोड़नी पड़ी थी। तब बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री थे।

ममता सरकार की मत्री के बिल पर भी हुआ था विवाद
2011 में तृणमूल सरकार के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन महिला, बाल एवं समाज कल्याण विकास मंत्री सावित्री मित्रा ने चश्मे के लिए 1 लाख रुपये का बिल जमा किया था। विवाद बढ़ने और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने पैसे वापस कर दिए थे। ममता बनर्जी ने कहा था कि बिल गलती से जमा हो गया था। दोनों ही मामलों में मेडिकल बिल मंत्रियों की ओर से जमा किए गए थे। इस बार एक विधायक का मेडिकल बिल विवाद के केंद्र में है। हालांकि विधायकों की ओर से अस्पताल का बिल प्रस्तुत करने और प्रतिपूर्ति का दावा करने की कोई ऊपरी सीमा नहीं है।

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