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Thursday, April 30, 2026
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हरियाणा में कांग्रेस कब तय करेगी CLP लीडर, नायब सरकार क्यों चाहती है जल्द हो फैसला

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चंडीगढ़

हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (CLP लीडर) की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गई है। राज्य सरकार की ओर से दो सप्ताह पहले कांग्रेस को पत्र लिखकर सीएलपी लीडर का नाम भेजने का आग्रह किया गया था, लेकिन पार्टी ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। अब हरियाणा सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस को टाइम बाउंड रिमाइंडर भेजने जा रही है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को इस संबंध में रिमाइंडर भेजने के निर्देश दिए हैं।

क्यों परेशान है सरकार?
मुख्य सचिव के अनुसार, हरियाणा में मुख्य सूचना आयुक्त सहित सात राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्तियां लटकी हुई हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत इन पदों पर नियुक्तियों के लिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी जरूरी है। सरकार की दलील है कि नेता प्रतिपक्ष की गैर-मौजूदगी के चलते RTI एक्ट की धारा 15(3) के तहत बननी वाली तीन सदस्यीय चयन समिति अधूरी है। करीब 10 हजार RTI आवेदन बिना जवाब के लंबित हैं। सूचना आयोग में कुल 345 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 14 सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने भी मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए आवेदन किया है। प्रक्रिया पूरी करने के लिए CLP लीडर जरूरी है, ताकि सर्च कमेटी की बैठक बुलाई जा सके और नामों पर निर्णय लिया जा सके।

गुटबाजी बनी बाधा
हरियाणा कांग्रेस में दो प्रमुख गुट सक्रिय हैं। एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का है, जबकि दूसरा गुट कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला का। हुड्डा समर्थक विधायक उन्हें सीएलपी लीडर बनाना चाहते हैं, वहीं दूसरा गुट अपने समर्थक विधायक को यह जिम्मेदारी देना चाहता है। इसी खींचतान के चलते केंद्रीय नेतृत्व अब तक नाम तय नहीं कर पाया है।

संगठन की कमी
पिछले 10 वर्षों से हरियाणा में कांग्रेस का मजबूत संगठनात्मक ढांचा नहीं है। इस दौरान दो प्रदेश अध्यक्ष इस्तीफा दे चुके हैं और कोई ठोस पुनर्गठन नहीं हुआ। यही कारण है कि कांग्रेस को चुनावों में बार-बार हार का सामना करना पड़ा है। राज्य सरकार अब कांग्रेस को टाइम बाउंड रिमाइंडर भेजेगी। अगर इसके बाद भी कांग्रेस CLP लीडर का नाम नहीं भेजती है, तो सरकार कानूनी राय लेकर अगली कार्रवाई करेगी। इस स्थिति में सूचना आयोग की नियुक्तियों में और देरी हो सकती है, जिससे RTI आवेदकों को लंबे समय तक जवाब नहीं मिल पाएगा।

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