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1,2,3,4,5… चीन ये आंकड़े देख होगा परेशान, भारत में तूफानी वापसी का संकेत

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नई दिल्‍ली

हाल के कुछ दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजारों में मजबूत वापसी की है। पिछले लगातार पांच सत्रों के दौरान एफआईआई इनफ्लो पॉजिटिव रहा है। यह इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार को लेकर उत्साहित हैं। भारत से उन्‍होंने जिस रफ्तार से पैसा निकाला था, शायद अब उसी रफ्तार से वे वापसी कर सकते हैं। हालांकि, ये रुझान शुरुआती हैं। लेकिन, इससे थोड़ा अनुमान जरूर लगाया जा सकता है। इन आंकड़ों को देखकर चीन की चिंता जरूर बढ़ेगी। खासकर अगर यह ट्रेंड बना रहता है तो यह उसकी नींद उड़ाएगा। यह संकेत दे सकता है कि ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स अब भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में अधिक तवज्‍जो दे रहे हैं।

25 अप्रैल से 2 मई के बीच विदेशी निवेशकों (एफआईआई) का इनफ्लो हर दिन पॉजिटिव रहा है। यह शुरुआती संकेत है कि एफआईआई ने भारत की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई कंपनियां अपनी सप्‍लाई चेन में विविधता लाना चाहती हैं। ‘चीन प्लस वन’ रणनीति के तहत भारत एक आकर्षक विकल्प के रूप में उभर रहा है। निवेशक इस बात को अच्‍छी तरह से समझ रहे हैं।

क्‍यों हो रही है वापसी?
भारत सरकार की ओर से उठाए गए नीतिगत कदम, जैसे ‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्‍शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्‍कीमें विदेशी निवेश को आकर्षित कर रही हैं। मजबूत आर्थिक विकास दर और विशाल घरेलू बाजार विदेशी निवेशकों में भारत का आकर्षण बढ़ाते हैं। भारत में युवा और बढ़ती आबादी है। यह लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना देती है। उसका बढ़ता तकनीकी क्षेत्र और प्‍लस पॉइंट है जो विदेशी निवेशकों को लुभा रहा है। खासतौर से आईटी और डिजिटल सेवाओं में भारत की प्रगति ने सभी को हैरान किया है।

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध अभी थमता नहीं दिख रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के ऊंचे टैरिफ से चीन में गुस्‍से में है। अब तक अमेरिका को जवाब देने में भी वह पीछे नहीं रहा है। हालांकि, इस रस्‍साकशी ने निश्चित रूप से कंपनियों को अपनी सप्‍लाई चेन में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया है। इससे भारत को एक विकल्प के रूप में देखने में मदद मिली है।

तेजी से बदलता है एफआईआई का रुख
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि विदेशी निवेश के निर्णयों को प्रभावित करने वाले कई फैक्‍टर हैं। सिर्फ टैरिफ ही एकमात्र कारण नहीं हैं। बेशक, भारत में निवेश बढ़ रहा है। लेकिन, चीन अभी भी कई विदेशी निवेशकों के लिए प्रमुख डेस्टिनेशन बना हुआ है।

विदेशी निवेशकों की पूंजी का प्रवाह बहुत गतिशील होता है। यह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों के आधार पर तेजी से बदल जाता है। हाल में कुछ समय के लिए विदेशी निवेशकों ने भारत से ज्यादा चीन की ओर रुख किया है। इसके कई कारण है। इनमें चीन के शेयर बाजार में आई तेजी एक कारण है। हालांकि, अब दोबारा भारत की ओर विदेशी निवेशकों का रुख हुआ है।

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