नई दिल्ली:
देश के दूसरे सबसे अमीर और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी का बांग्लादेश पर अरबों रुपया बकाया है। यह रुपया अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पावर का है। अगर बांग्लादेश ने यह रकम नहीं चुकाई तो इस पड़ोसी देश पर नया संकट आ सकता है। बता दें कि हाल ही में बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इस प्रदर्शन के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देने के बाद देश छोड़ना पड़ा था। ऐसे में अडानी पावर का पैसा चुकाने की जिम्मेदारी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर है।
अडानी पावर बांग्लादेश को बिजली की सप्लाई करती है। बांग्लादेश पर अडानी पावर का 80 करोड़ डॉलर (करीब 6711 करोड़ रुपये) बकाया है। बांग्लादेश में तख्तापलट होने के बाद अडानी की यह रकम फंस गई है। जानकारों के मुताबिक अगर बांग्लादेश इस रकम का पेमेंट नहीं करता है तो कंपनी बांग्लादेश को बिजली की सप्लाई रोक सकती है। ऐसे में बांग्लादेश के सामने अंधेरे में डूबने का संकट पैदा हो जाएगा। अडानी पावर झारखंड में लगे अपने पावर प्लांट से बांग्लादेश को बिजली की सप्लाई करता है।
बांग्लादेश की सरकार को पूरी जानकारी
इस बकाया रकम के बारे में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को पूरी जानकारी है। बांग्लादेश बैंक के नए गवर्नर अहसान एच मंसूर ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर हम अडानी पावर को यह रकम नहीं चुकाते हैं तो कंपनी हमें बिजली देना बंद कर देगी। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार इस मसले के समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। फिलहाल अडानी पावर की बिजली काटने की कोई योजना नहीं है। हालांकि अगर कर्जदार और कोयला सप्लाई करने वालों ने अगर कंपनी पर दबाव बनाया तो उसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।
कंपनी पर पड़ेगा असर
बांग्लादेश अगर यह भुगतान देरी से करता है तो इससे कंपनी के संचालन पर भी असर पड़ेगा। दरअसल, अडानी ग्रुप पिछले कुछ समय से देश के बाहर तेजी से अपने कदम फैला रहा है। इनमें पड़ोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल पर खास नजर है। अगर बांग्लादेश बिजली का भुगतान रोकता है या देरी से करता है तो अडानी ग्रुप की इन देशाें में चल रहीं योजनाओं को झटका लग सकता है।
और भी कंपनियां देती हैं बांग्लादेश को बिजली
अडानी पावर के अलावा देश की दूसरी कंपनियां भी बांग्लादेश को बिजली की सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों में एनटीपीसी लिमिटेड और पीटीसी इंडिया लिमिटेड समेत भारत की कुछ अन्य सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इस बात की कोई जानकारी नहीं मिली है कि क्या इन कंपनियों का बांग्लादेश पर कुछ बकाया है या नहीं।
