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तुर्की और सीरिया के बाद क्या भारत में भी आ सकता है भूकंप?

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तुर्की और सीरिया में भूकंप से हुई तबाही के बाद अब भारत को लेकर भविष्यवाणी की गई है। इसमें बताया गया है कि आने वाले कुछ दिनों में अफगानिस्‍तान में बड़ा भूकंप आएगा और भारत और पाकिस्‍तान के कुछ हिस्‍से भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। हालांकि उनकी इन बातों की कुछ लोग आलोचना भी कर रहे हैं, लेकिन इससे पहले सच हुई भूकंप से जुड़ी भविष्‍यवाणी उनके दावे का समर्थन कर रही है। आइए जानते हैं किसने की है यह भविष्‍यवाणी और भूकंप का ज्‍योतिषीय ग्रहों से क्‍या कनेक्‍शन है।

अभी हाल ही में 6 फरवरी को तुर्की और सीरिया में आए जबरदस्त भूकंप से लाखों लोग बेघर हुए और जान गंवाने वालों की तादात हर बीते दिन के साथ बढ़ती जा रही है। इस भूकंप से तीन दिन पहले नीदरलैंड के एक भूवैज्ञानिक ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की थी कि मध्य पूर्व एशिया के देशों में एक बड़ा भूकंप कभी भी आ सकता है। अब वही डच वैज्ञानिक हूगार बीट्स यह दावा कर रहे हैं कि आने वाले कुछ दिनों में अफगानिस्तान में भी कोई बड़ा भूकंप आ सकता है जिसकी जद में पाकिस्तान और भारत का एक बड़ा भूभाग आ सकता है।

ज्योतिष के दृष्टिकोण से हम यह कहना चाहेंगे की भूकंप की भविष्यवाणी कुछ सीमा तक की जा सकती हैं किन्तु उसकी संभावित दिशा और तीव्रता का अनुमान लगाना बेहद कठिन है। इस संबंध में हमने पिछले वर्ष 8 नवंबर को पड़े चंद्र ग्रहण से पूर्व प्रकशित इस लेख में भूकंप की भविष्यवाणी की थी।

चंद्र ग्रहण देगा महंगाई और भूकंपन के झटके
9 नवंबर की सुबह ही, ग्रहण के कुछ घंटों के बाद, नेपाल और उत्तर भारत में भूकंप के झटके महसूस किये गए थे। तब भी भूकंप को ग्रहण तथा प्राकृतिक उत्पातों से जोड़ कर देखा गया था।

ज्योतिषशास्त्र में ये हैं भूकंप के योग
पिछली सदी के प्रख्यात ज्योतिषी डॉक्टर बी वी रमन ने 200 से अधिक बड़े भूकंपों के समय की कुंडली (ग्रह स्थिति) निकालकर कुछ ज्योतिषीय सूत्र दिए हैं। गर्ग संहिता के अनुसार भूकंप अधिकतर ग्रहण, पूर्णिमा या अमावस्या के आस-पास आते हैं। जब बड़े ग्रह जैसे मंगल, शनि, राहु और गुरु परस्पर केंद्र या त्रिकोण में हों तब भूकंप की संभावना अधिक होती है। बड़े भूकंप अधिकतर मध्य रात्रि, मध्याह्न या फिर सुबह के समय आते हैं।

बड़े ग्रह जब पृथ्वी तत्त्व की राशियों ( वृषभ, कन्या और मकर) या फिर वायु तत्व की राशियों जैसे कुंभ, तुला या मिथुन में हों तब बेहद भीषण भूकंप आ सकते हैं। तुर्की और सीरिया में आए भूकंप के समय मंगल पृथ्वी तत्व की राशि वृषभ में थे तथा शनि वायु तत्व की राशि कुंभ में गोचर कर रहे थे। शुक्र भी कुंभ राशि में थे तथा सूर्य पृथ्वी तत्व की राशि मकर में चल रहे थे। संयोग से यह भूकंप 5 फरवरी की पूर्णिमा के अगले दिन सुबह के समय ही आया था।

बड़े भूकंप से पहले प्रकृति में दिखते हैं ये लक्षण
मेदिनी ज्योतिष के पांचवी सदी में लिखे गए ग्रन्थ ‘बृहत् संहिता’ के 32 वें अध्याय का नाम ही ‘भूकंप लक्षण’ हैं जिसमें आचार्य वराहमिहिर ने बड़े भूकंपों से पूर्व प्रकृति में दिखने वाले कुछ लक्षणों के बारे में बताया है। आचार्य वराहमिहिर के अनुसार वायव्य मंडल के नक्षत्रों में भूकंप से पहले आकाश में चारों और धुआं सा छाया रहता है, धूल भरी आंधी चलती है, सूर्य की किरणे धीमी पड़ जाती हैं। अग्नि मंडल के नक्षत्रों में भूकंप से पूर्व तारे टूटते हैं या उल्का पात होता दिखता है। तेज हवा और जंगल में आग लगती है।

तुर्की में भूकंप से पहले मिला था यह संकेत
संयोग से तुर्की और सीरिया में आया भूकंपन अग्नि मंडल के नक्षत्र मघा में था। इस भूकंप के दिन आकाश में एक हरे रंग का धूमकेतु दिखाई दिया था जो कि पृथ्वी से 50 हज़ार वर्ष पूर्व ही इससे पहले दिखाई दिया था। वराहमिहिर के अनुसार प्रकृति के उत्पातों का प्रभाव दो माह तक रह सकता है। अतः इस हरे रंग के धूम्रकेतु के प्रभाव से अगले दो माह में कोई अन्य भूकंप अमावस्या या पूर्णिमा के आस-पास आ जाए तो ज्योतिष के दृष्टिकोण से कोई आश्चर्य नहीं होगा। किन्तु हम यहां एक बार फिर दोहराना चाहेंगे की भूकंप की तीव्रता और उसकी दिशा का भविष्य कथन बेहद कठिन है। 20 फरवरी की अमावस्या तथा 7 मार्च की पूर्णिमा ग्रह-गणित के अनुसार प्रकृति उत्पातों जैसे भूकंप तथा बड़े नेताओं के लिए बेहद संवेदनशील है। वृषभ राशि में चल रहे मंगल तथा कुंभ के शनि पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा उत्तरी भारत के लिए प्राकृतिक उत्पातों का संकेत दे रहे हैं।

सचिन मल्होत्रा, ज्योतिषशास्त्री

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