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भारत का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी अमेरिका की मंदी! लेकिन यह ‘तूफान’ मचा सकता है तबाही, किसने दी चेतावनी?

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नई दिल्ली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के कारण अमेरिका पर मंदी पर खतरा मंडरा रहा है। कुछ एक्सपर्ट के मुताबिक मंदी ने अमेरिका में दस्तक भी दे दी है। माना जा रहा है कि अमेरिका की मंदी भारत समेत दुनियाभर को अपनी चपेट में ले लेगी। लेकिन इन्वेस्टमेंट बैंक और फाइनेंशियल सर्विस कंपनी गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का मानना कुछ और है।

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में भारत और अमेरिका की अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ बातें बताई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगर अमेरिका की अर्थव्यवस्था धीमी होती है तो भारत पर उसका असर कम होगा। लेकिन, दोनों देशों के शेयर बाजार आपस में जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका में मंदी का असर दूसरे देशों के मुकाबले कम होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत का व्यापार अमेरिका पर कम निर्भर है।

क्यों पड़ेगा असर कम?
भारत का सामान निर्यात उसकी जीडीपी का करीब 12% है। चीन में यह 19% और वियतनाम में 82% है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को अमेरिका में आर्थिक मंदी के पूरे प्रभाव से बचाने में मदद मिलती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले 20 सालों में भारत की GDP की ग्रोथ पर ग्लोबल कारणों का ज्यादा असर नहीं हुआ है। सिर्फ साल 2008 में आई ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (GFC) और 2019-20 में COVID-19 महामारी जैसी बड़ी घटनाओं के दौरान ही असर हुआ था।

तो फिर डर क्या है?
अर्थव्यवस्था सुरक्षित होने के बावजूद भारत का शेयर बाजार अमेरिका के बाजार से जुड़ा हुआ है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार (खासकर निफ्टी 50 इंडेक्स) का अमेरिका के S&P 500 कंपोजिट इंडेक्स के साथ पिछले एक दशक में गहरा संबंध रहा है। निफ्टी 50 भारत की 50 सबसे बड़ी कंपनियों का इंडेक्स है। S&P 500 अमेरिका की 500 सबसे बड़ी कंपनियों का इंडेक्स है।

साल 2005 से 2015 तक, निफ्टी 50 और S&P 500 इंडेक्स की चाल में कुछ अंतर था। लेकिन साल 2015 के बाद उनका प्रदर्शन एक जैसा होने लगा। साल 2020 की शुरुआत में कोरोना के कारण बाजार में गिरावट आई थी। इसके बाद दोनों इंडेक्स तेजी से बढ़े और 2021 के अंत तक नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। बीच-बीच में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन दोनों बाजारों का रुझान ऊपर की ओर रहा।

थोड़ी दिक्कतें रहेंगी
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आर्थिक विकास में कुछ समय के लिए दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए लागत और मुनाफे पर ध्यान रखना होगा। यही कारण है कि कंपनी ने कुछ कंपनियों के वैल्यूएशन मल्टीपल को कम कर दिया है। वैल्यूएशन मल्टीपल का मतलब है कि कंपनी के शेयर की कीमत उसकी कमाई के मुकाबले कितनी है। कंपनी ने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि उसे लगता है कि अब काम करना मुश्किल होगा।

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