भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर लगातार नए फैसले हो रहे हैं। Electric Vehicles (EV) पॉलिसी को लेकर भारत सरकार भी नए कदम उठा रही है। अभी Tesla भारत में एंट्री को लेकर चर्चा में है। वह भारत में 30 बिलियन डॉलर निवेश करने पर विचार कर रहे हैं। मस्क ये निवेश अगले 5 साल में मैनुफैक्चरिंग प्लांट में डायरेक्ट या इन-डायरेक्ट दोनों ही तरीके से कर सकते हैं।
इसमें डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों ही तरीके का निवेश किया जाएगा। भारतीय प्लांट से छोटी कार प्रोड्यूस करने पर जोर दिा जाएगा और इसे दुनियाभर में भेजा जाएगा। पांच साल के अंदर, बैटरी इंडस्ट्री इकोसिस्टम के लिए 15 बिलियन डॉलर निवेश किए जाएंगे। नई EV Policy भी काफी बड़ी है और टेस्ला को लेकर कोई अलग पॉलिसी नहीं है। हालांकि अभी तक ये भी साफ नहीं है कि Tesla के लिए अलग से सब्सिडी पॉलिसी है या नहीं।
भारतीय लग्जरी कार मार्केट में कंपटीशन को देखते हुए कंपनी अपनी कुछ कारें लाना चाहती है और चार्जिंग इकोसिस्टम की भी टेस्टिंग कर रही है। भारत में फैक्ट्री में भी टेस्ला जल्दी निवेश कर सकती है, दरअसल कंपनी छोटी कार लाने पर काम कर रही है। ये फैसिलिटी 3 साल में पूरी कर ली जाएगी। हालांकि अभी तक कारों के प्राइसिंग स्ट्रक्चर के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हुई है। इसकी मदद से कंपनी एशिया में कारों की डिमांड बढ़ाने पर काम करेगी।
लोकल मेड-इन-इंडिया कंटेंट के हाई डिग्री पर भी काम किया जा रहा है। भारतीय बाजार में भी इन्हीं कारों की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। अगर ये प्लान अमल हो जाता है तो ये किसी भी विदेशी कंपनी की भारत में सबसे ज्यादा निवेश होगा। यानी सीधा 3 बिलियन डॉलर का निवेश काफी बड़ा हो जाता है। ऐसे में भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी काफी मदद मिलेगी। इससे पहले भी सुजुकी भारत में काफी निवेश कर चुकी है। इसके अलावा ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियों ने भी भारत में अपना प्लांट लगाया था जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ था।
