नई दिल्ली
सरकार पर अक्सर बड़ी कंपनियों का पक्ष लेने का आरोप लगता रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार कॉर्पोरेट्स को बड़ी-बड़ी टैक्स छूट देती है जबकि आम आदमी और नौकरीपेशा लोगों पर बोझ डालती है। लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं। लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में सरकार ने आम टैक्सपेयर्स और HUF (हिन्दू अविभाजित परिवार) को कंपनियों के मुकाबले लगभग दोगुनी टैक्स छूट दी है। इस दौरान इंडिविजुअल्स और HUF को कुल 8.7 लाख करोड़ रुपये की छूट मिली है जबकि कॉर्पोरेट टैक्स में सिर्फ 4.5 लाख करोड़ रुपये की छूट दी गई।
सरकार आम आदमी पर टैक्स कम करने के लिए समय-समय पर इनकम टैक्स स्लैब और टैक्स रेट में बदलाव करती रही है। नई टैक्स व्यवस्था में ज्यादातर लोगों के लिए टैक्स रेट पुराने सिस्टम के मुकाबले कम हैं। इस बजट में पेश की गई नई व्यवस्था से लोगों के टैक्स में और भी कमी आएगी। जिससे उनके हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा और वे ज्यादा खर्च कर पाएंगे। नए इनकम टैक्स प्रस्तावों का मतलब है कि सरकार लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष करों में कमी करेगी
क्या होगा फायदा
इससे घरेलू खपत को बढ़ावा मिलेगा, खासकर ऐसे समय में जब दुनियाभर में व्यापार की रफ्तार धीमी होने की उम्मीद है। सरकार ने 12 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स को फ्री कर दिया है। अगर आपके हाथ में ज्यादा पैसा होगा, तो आप इससे ज्यादा सामान खरीद सकेंगे। इससे इकॉनमी को गति मिलेगी। सरकार की कोशिश है कि टैक्स में छूट देकर लोगों की जेब में ज्यादा पैसा डाला जाए और अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाए।
