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Friday, April 24, 2026
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5 स्टार सेफ्टी रेटिंग वाली कार में थे साइरस, फिर क्यों नहीं बच पाई जान?

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नई दिल्ली,

रविवार को मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर एक कार दुर्घटना में टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री का निधन हो गया. हादसे के वक्त मिस्त्री मर्सिडीज बेंज जीएलसी 220 डी 4मैटिक में ड्राइवर सीट के पीछे वाली सीट पर अपने मित्र जहांगीर के साथ बैठे थे.हादसे में रियर सीट पर बैठे दोनों लोगों की मौत हो गई जबकि कार चला रही डॉ अनाहिता और उनके पति गंभीर रूप से घायल हो गए, जिस कार में मिस्त्री सवार थे उसे यूरोप के सख्त NCAP टेस्ट में 5 स्टार रेटिंग मिली थी. 6 एयरबैग होने और ताकतवर टक्कर को झेलने वाले मजबूत बोनट के बावजूद मिस्त्री की मौत बताती है कि कार की रफ्तार उस वक्त काफी ज्यादा रही होगी. इसके अलावा पीछे बैठे दोनों लोगों का सीट बेल्ट ना लगाना भी मौत की वजह बना है.

क्या होती है किसी कार की सेफ्टी रेटिंग?
कार खरीदते समय अक्सर ग्राहक कार के लुक, डिज़ाइन, माइलेज और कीमत को ही ध्यान में रखकर फैसला करते हैं. लेकिन दुर्घटना होने की स्थति में क्या ये कार उसमें सवार लोगों को बचा सकती है? ये जानने की कोई कोशिश नहीं करता. लेकिन नियमों में बंधी कंपनियों को जरूर ये जानकारी ग्राहकों को देनी होती है जिसे जानकर ग्राहक कार खरीदने का फैसला करते हैं.

इसे सेफ्टी टेस्ट कहा जाता है, जो क्रैश टेस्ट से पता करता है कि कार कितनी सुरक्षित है? इस सेफ्टी टेस्ट के लिए ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम यानी GNCAP कारों का क्रैश टेस्ट करके सेफ्टी रेटिंग देती है. इसी टेस्ट में उनकी सेफ्टी का पता चलता है.

ये सेफ्टी बड़े और बच्चों दोनों के लिए अलग-अलग होती है. सेफ्टी टेस्ट में कार के एयरबैग्स, ABS, EBD, कैमरा, स्पीड अलर्ट, सेफ्टी बेल्ट, बैक सेंसर जैसे फीचर्स का इम्तिहान होता है. कार के क्रैश टेस्ट के दौरान ये सेफ्टी फीचर्स तय करते हैं कि कार क्रैश के वक्त कार में बैठे लोगों का कितना नुकसान हुआ.

इसके लिए टेस्ट की जाने वाली कार में एक इंसान जैसी डमी को बिठाया जाता है. टेस्ट के दौरान गाड़ी की टक्कर एक तय रफ्तार पर किसी ठोस चीज के साथ करवाई जाती है. इस दौरान कार में 4 से 5 डमी होते हैं और रियर सीट पर बच्चे की डमी भी रखी जाती है जिससे चाइल्ड सेफ्टी का पता लगता है.

क्रैश टेस्ट से पता चलता है कि हाई स्पीड पर टक्कर के दौरान एयरबैग खुला या नहीं, इंसानों की डमी को कितना नुकसान हुआ? इसके कार के दूसरे सेफ्टी फीचर्स का भी जायजा लिया जाता है और इन सभी के आधार पर रेटिंग दी जाती है. हालांकि NCAP किसी भी कार के सभी वैरिएंट्स का क्रैश टेस्ट नहीं करता है.

कैसे समझें कार की सेफ्टी स्टार रेटिंग का मतलब?
अगर किसी कार का बेस मॉडल ग्राहक खरीद रहा है तो वो महंगी और लग्जरी कारों को छोड़कर आमतौर पर 0-2 सेफ्टी रेटिंग की होती है. अगर किसी कार को 1-2 स्टार मिले हैं तो उसमें भी नाममात्र के सेफ्टी फीचर्स ही होते हैं. 2 स्टार सेफ्टी रेटिंग वाली कार में एयरबैग की संख्या कम होती है. 3 स्टार रेटिंग की कार ज्यादातर वो लोग खरीदते हैं जो परिवार के संग ज्यादा यात्रा करते हैं. 3 स्टार रेटिंग वाली कार ड्राइवर और अगली सीट पर बैठे दूसरे पैसेंजर के लिए सुरक्षित मानी जाती है. इसमें अक्सर आगे की तरफ एयर बैग्स लगे होते हैं जो टक्कर की दशा में आगे वाले दोनों लोगों को बचाने में 50-70 प्रतिशत तक सेफ माने जाते हैं.

वहीं अगर किसी कार को 4 या 5 स्टार मिले हैं तो फिर वो अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित है. इस तरह की कार में सफर करने वालों को कम नुकसान होता है. हालांकि 5 स्टार कार भी 100 फीसदी सुरक्षित नहीं हो सकती और साइरस मिस्त्री की मौत ये बताती है कि भारतीय सड़कों पर कुछ नियमों खासकर रफ्तार और सीट बेल्ट का ध्यान चालक और सवारियों को खुद रखना होगा क्योंकि ये एक कार है टैंक नहीं.

भारत में जल्द शुरू होगा क्रैश टेस्ट
ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम यानी GNCAP जल्दी ही भारत में भी कारों की क्रैश टेस्टिंग शुरू करेगी. जून में सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक ट्वीट में ये जानकारी दी थी कि Bharat NCAP को मंजूरी दे दी गई है, फिलहाल कारों को जर्मनी के म्यूनिख में स्थित ADAC के तकनीकी केंद्र में क्रैश टेस्ट कराने की सुविधा उपलब्ध है. ब्रिटेन में भी इसका एक सेंटर है. लेकिन अगले साल अप्रैल से ये भारत में भी शुरू हो जाएगा जिसके बाद सभी कंपनियों के लिए ये टेस्ट कराना और कारों का ज्यादा सुरक्षित बनाना आसान हो जाएगा.

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