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‘सिर्फ कट, कॉपी और पेस्ट न करें, दिमाग भी लगाएं…’, अनिल अंबानी के मामले में कोर्ट ने लगाई बैंकों को फटकार

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नई दिल्ली

अनिल अंबानी के एक मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बैंकों को फटकार लगाई है। मामला अनिल अंबानी के बैंक अकाउंट्स को ‘फ्रॉड’ घोषित करने से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि बैंक किसी के भी अकाउंट्स को ‘डिफॉल्टर’ या ‘फ्रॉड’ घोषित करने वाले आदेशों को ‘कट, कॉपी और पेस्ट’ नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बैंकों को सोच-समझकर फैसला लेना होगा।

यह मामला अनिल अंबानी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें उन्होंने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 10 अक्टूबर 2024 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में उनके खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित किया गया था। कोर्ट ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को अंबानी की याचिका के जवाब में अपना हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी।

रिजर्व बैंक से संपर्क करने का निर्देश
जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और नीला गोखले की खंडपीठ ने अंबानी को इस आदेश के खिलाफ रिजर्व बैंक से संपर्क करने का निर्देश दिया। पीटीआई के अनुसार, कोर्ट ने कहा, ‘ऐसे आदेश कॉपी-पेस्ट करके नहीं दिए जा सकते। दिमाग लगाना होगा। आखिरकार यह जनता का पैसा है। हम ऐसे लापरवाही भरे आदेश बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसके लिए कोई व्यवस्था होनी चाहिए।’

क्या कहा अंबानी ने?
अनिल अंबानी का कहना है कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने उनके बैंक अकाउंट के बारे में आदेश देने से पहले उन्हें कोई सुनवाई का मौका नहीं दिया। उन्होंने बैंक की ओर जारी किए गए दो कारण बताओ नोटिस को भी चुनौती दी है। साथ ही, उन्होंने उन दस्तावेजों की प्रतियां मांगी हैं जिनके आधार पर बैंक ने यह आदेश दिया था। उनका दावा है कि उन्हें कोई डॉक्यूमेंट नहीं दिए गए।

कोर्ट ने दिखाई सख्ती
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले बार-बार सामने आ रहे हैं, जहां बैंक रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का पालन किए बिना खातों को ‘फ्रॉड’ या ‘विलफुल डिफॉल्टर’ घोषित कर देते हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि बैंकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि RBI के ‘मास्टर सर्कुलर’ में दिशानिर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट ने RBI को यह भी निर्देश दिया कि वह ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बैंक बिना विश्लेषण किए ऐसे आदेश न दें। कोर्ट ने कहा, ‘हमें लगता है कि यह जानबूझकर किया जा रहा है। कुछ नियंत्रण और संतुलन होना चाहिए, वरना यह चलता रहेगा।’

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