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महंगाई से राहत के बावजूद बढ़ेगा EMI का बोझ? मिल रहे ये संकेत

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नई दिल्ली,

लंबे समय से देश में महंगाई उच्च स्तर पर बनी हुई है. इसे काबू में करने के लिए रिजर्व बैंक ने लगातार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है. हालांकि, बीते अक्टूबर महीने में देश में महंगाई दर में कमी आई है. इसके बाद भी क्या आरबीआई (RBI) ब्याज दरों में वृद्धि करेगा? इस सवाल का जबाव शायद देश का हर नागरिक जानना चाहता है, क्योंकि ये मुद्दा आम लोगों की जेब से सीधा जुड़ा है. विशेषज्ञों की मानें तो केंद्रीय बैंक सोमवार प्रस्ताविक एमपीसी बैठक में रेपो रेट में एक और इजाफे का निर्णय ले सकता है.

सात दिसंबर को होगा ऐलान
पीटीआई के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बीते महीनों में कई बार रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद इस बार की मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों को बढ़ाने का ऑप्शन चुन सकता है. हालांकि, बीते दिनों की गई बढ़ोतरी की तुलना में रेपो रेट में नई वृद्धि कम रहने की संभावना है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोमवार शुरू होने वाली एमपीसी की बैठक (MPC Meeting) के आखिरी दिन बुधवार 7 दिसंबर को आरबीआई महंगाई दर में नरमी के संकेत के बीच रेपो रेट में 25 से 35 बेसिस प्वाइंट (BPS) की वृद्धि का ऐलान कर सकता है.

सितंबर में हुई थी आखिरी बढ़ोतरी
गौरतलब है कि इससे पहले 30 सितंबर को हुई आरबीआई की छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक में रेपो दरों में 0.50 फीसदी का इजाफा किया गया था. लेकिन बीते दिनों आए महंगाई के आंकड़े थोड़ा राहत भरे रहे और महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गई. लेकिन इसके बावजूद भी विशेषज्ञों का अनुमान है कि रेपो रेट 0.25- 0.35 फीसदी तक बढ़ सकता है. इस साल रिजर्व बैंक चार बार रेपो रेट में बढ़ोतरी (Repo Rate Hike) का फैसला ले चुका है.

इस साल ऐसे बढ़ा रेपो रेट
देश में तय लक्ष्य के ऊपर पहुंची महंगाई को नीचे लाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मई 2022 से अब तक चार बार रेपो रेट में वृद्धि का फैसला लिया है. RBI ने मई में रेपो रेट में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, जबकि इसके अगले ही महीने यानी जून में 0.50 फीसदी का इजाफा किया. इसके बाद अगस्त महीने में फिर से 0.50 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली, जबकि सितंबर में भी केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों को 0.50 फीसदी बढ़ाया था. मई से लेकर सितंबर तक रेपो रेट 1.90 फीसदी बढ़कर 5.90 फीसदी पर पहुंच गया है.

Repo Rate और ईएमआई में संबंध 
रेपो दर (Repo Rate) का सीधा संबंध बैंक से लिए जाने वाले लोन (Loan) और ईएमआई (EMI) से होता है. दरअसल, रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई (RBI) बैंकों को कर्ज देता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट उस दर को कहते हैं जिस दर पर बैंकों को आरबीआई पैसा रखने पर ब्याज देती है. रेपो रेट के कम होने से लोन की ईएमआई घट जाती है, जबकि रेपो रेट में बढ़ोतरी से सभी तरह का लोन महंगा हो जाता है और इसी क्रम में ईएमआई में भी इजाफा देखने को मिलता है.

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