नई दिल्ली,
भारतीय कंपनी ग्लोबल फार्मा हेल्थकेयर अमेरिका में आंखों की रोशनी पर गलत प्रभाव पड़ने की वजह से अपने आई ड्रॉप की पूरी खेप वापस ले रही है. इस बीच खबर आई है कि सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) और तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोलर ने शुक्रवार को चेन्नई स्थित ग्लोबल फार्मा हेल्थकेयर पर देर रात छापा भी मारा है. अमेरिकी अधिकारियों द्वारा इसके आईड्रॉप के संभावित रूप से कंटेमिनेटेड होने की जानकारी के बाद ये छापेमारी हुई है. इंडिया टुडे को सूत्रों के हवाले से ये खबर मिली है.
इस आईड्रॉप से अमेरिका में इंफेक्शन और आंखों की रोशनी प्रभावित होने की शिकायत के बाद ग्लोबल फार्मा हेल्थकेयर ने अपनी वेबसाइट पर पोस्ट कर अनुरोध किया है कि जिन थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और ग्राहकों के पास वापस मंगाए गए प्रोडक्ट हैं, उन्हें इसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए.
दवा निर्माता ने यह भी कहा कि वह अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है और इस दवा के चलते परेशानी का अनुभव करने वालों को तुरंत चिकित्सा सहायता लेने के लिए कहा है. यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने दावा किया है कि दवा से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की 55 ऐसी रिपोर्टें आई हैं, जिनमें आंखों में संक्रमण, दृष्टि की स्थायी हानि और यहां तक कि ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन से मौत भी शामिल है। अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक ने कहा कि इस कंटेमिनेटेड आईड्रॉप के उपयोग से आँखों में संक्रमण का खतरा हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप अंधापन भी हो सकता है.”
गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौत से जुड़े कुछ कफ सिरप के बाद चेन्नई स्थित फर्म द्वारा निर्मित आई ड्रॉप देश का ऐसा दूसरा दवा उत्पाद है जो जांच के दायरे में आया है. बता दें कि इस आर्टिफिशियल टीयर्स लुब्रिकेंट आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल जलन से बचाने या आंखों के सूखेपन को दूर करने के लिए किया जाता है और ये दवा भारत में नहीं बेची जाती है.
