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Monday, April 13, 2026
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सरकार ने दरकिनार की मस्क की मांग, बस 5 साल के होगी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम इजाजत

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टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने एलन मस्क की मांग की दरकिनार कर दिया है। दरअसल रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था कि एलन मस्क की तरफ से सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम आवंटन की ज्यादा समयसीमा की मांग की गई थी। लेकिन सरकार ने उस मांग की मानने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि सरकर ने कम समयसीमा रखने का सुझाव दिया है। यह लिमिट 5 साल हो सकती है। मतलब स्टारलिंक सर्विस को 5 साल बाद दोबारा सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के लिए आवेदन करना होगा।

क्यों 5 साल की तय की गई समयसीमा
एक्सपर्ट की मानें, तो सरकार की 5 साल की लिमिट एलन मस्क की स्टारलिंक के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि स्टारलिंक 20 साल के परमिट की वकालत कर रही है। दूरसंचार नियामक सरकार के लिए सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन की सिफारिश की तैयारी कर रहा है, जिसमें इसकी समयसीमा और कीमत को तय किया गया है। रिपोर्ट की मानें, तो TRAI कम समय के लिए लाइसेंस समयसीमा को अहमियत देने की योजना बना रहा है। यह करीब 5 साल हो सकती है। एलन मस्क का कहना है कि 5 साल में मार्केट में पोजिशन बनानी होगी। इसके बाद दोबारा से लाइसेंस प्रक्रिया के लिए आवेदन करना होगा।

मस्क ने 20 साल की रखी मांग
सरकार से संकेत दिया है कि TRAI को लाइसेंस समयसीमा पर अपनी सिफारिशों को अंजाम देने में करीब एक माह का समय लग सकता है, जहां स्टारलिंक ने सरकार से 20 साल के स्पेक्ट्रम आवंटन की मांग की है। मस्क का दावा है कि इससे अफोर्डेबल प्राइसिंग और लॉन्ग टर्म कॉमर्शियल योजनाओं को अंजाम देने में मदद मिलेगी। जियो ने तीन साल की कम समयसीमा की मांग की है। एयरटेल ने भी कम लाइसेंस समयसीमा का सपोर्ट किया है, जो 3-5 साल की समयसीमा की वकालत करता है।

5 साल समयसीमा को बताया अच्छा
लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि कम समयसीमा भारत को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार के विकसित होने के साथ स्पेक्ट्रम की कीमतों में बदलाव को आसान बनाएंगी। मतलब यूजर के फायदे के लिए 5 साल की समयसीमा सही है।

विरोध के बाद स्टारलिंक से जियो एयरटेल की साझेदारी
एलन मस्क की स्टारलिंक ने एयरटेल, जियो के साथ सैटेलाइट कनेक्टिविटी के लिए साझेदारी की है। बता दें कि पहले तक जियो और एयरटेल दोनों ने पहले सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के नीलामी की प्रक्रिया की मांग की थी। हालांकि सरकार ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के प्रशासनिक आवंटन की बात कही थी। सरकार के मूड में बदलाव को न देखते हुए जियो और एयरटेल की तरफ से स्टारलिंक के साथ साझेदारी की गई है।

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