नई दिल्ली
देश में अभी 50 से ज्यादा वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही हैं। सरकार ने मार्च 2027 तक 400 वंदे भारत ट्रेन चलाने का लक्ष्य रखा है। 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने की जिम्मेदारी काइनेट रेल सॉल्यूशंस को मिली है जो भारत और रूस का जॉइंट वेंचर है। इसमें रेल विकास निगम की 25%, रूसी कंपनी मेट्रोवैगनमैश की 70 फीसदी और लोकोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स की 5 फीसदी हिस्सेदारी है। हिंदू बिजनसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी अगले साल से महाराष्ट्र की लातूर फैसिलिटी में वंदे भारत ट्रेनों का उत्पादन शुरू करना चाहती है और इसके लिए पंजाब नेशनल बैंक से 450 से 500 करोड़ रुपये का लोन मांग रही है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कह गया है कि इस लोन के लिए रूस की कंपनी Sberbank Rossii की बैकिंग होगी जो इस प्रोजेक्ट के लिए सॉवरेन गारंटर और फाइनेंसर का काम कर रहा है। काइनेट रेल सॉल्यूशंस को 2023 में 120 वंदे भारत ट्रेन बनाने का ठेका मिला था। इनमें से हरेक ट्रेन में 16 कोच होंगे। प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में कंपनी को वर्किंग कैपिटल की जरूरत होगी जिसके लिए बैंक से बातचीत चल रही है।
कब बनेगी ट्रेन
कंपनी पहले ही 450 करोड़ रुपये के ठेके सीजी पावर को दे चुकी है। ये ठेके इंजन, पावर सिस्टम और इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स लगाने के लिए है। ट्रेनों के इंटीरियर डिजाइन के लिए जल्दी ही टेंडर आने की उम्मीद है। इस बारे में काइनेट ने सवालों का जवाब नहीं दिया। ट्रेन की बनावट को लेकर पहले ही लंबी बातचीत चली थी जिससे इस प्रोजेक्ट में काफी देरी हो चुकी है। रेलवे 16 के बजाय 24 डिब्बों की ट्रेन चाहती थी। आखिरकार उसने मूल अनुबंध को मान लिया। इसका प्रोटोटाइप जून 2026 में आने बनकर तैयार होने की संभावना है। इसके बाद ट्रायल होंगे और फिर ट्रेनों का निर्माण शुरू होगा।
