नई दिल्ली:
एक समय था जब भारत और इटली की जीडीपी पीपीपी के हिसाब से बराबरी पर थी। यह बात 1995 की है। तब भारत में आर्थिक उदारीकरण का दौर शुरू हुआ था। उस समय पीपीपी के हिसाब से भारत की जीडीपी का आकार 1.3 ट्रिलियन डॉलर था। उस समय इटली की जीडीपी का साइज भी इतना ही था। लेकिन इसके बाद भारत ने ऐसी रेस लगाई कि इटली कहीं पीछे छूट गया। 2022 में पीपीपी के हिसाब से भारत की जीडीपी का आकार 11 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया जबकि इटली की जीडीपी मुश्किल से तीन ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच पाई है। यानाी 29 साल में भारत की जीडीपी करीब साढ़े गुना बढ़ी है वहीं इटली की जीडीपी करीब दोगुना हुई है। पीपीपी के आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी है। क्रय शक्ति समानता यानी पीपीपी का इस्तेमाल अर्थव्यवस्थाओं में एकसमान वस्तुओं की कीमत के स्तर की तुलना करने के लिए किया जाता है।
जहां तक नॉमिनल जीडीपी की बात है तो भारत 3.469 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकॉनमी है। वहीं इटली की इकॉनमी का साइज 1.99 ट्रिलियन डॉलर है और यह दुनिया की दसवीं सबसे बड़ी इकॉनमी है। भारत आज दुनिया में सबसे अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही इकॉनमी है। माना जा रहा है कि अगले कुछ साल में भारत जर्मनी और जापान को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बन जाएगा। अभी अमेरिका पहली, चीन दूसरी, जर्मनी तीसरी और जापान चौथी सबसे बड़ी इकॉनमी है। इस साल भारत की इकॉनमी के सात परसेंट की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है जबकि इटली की इकॉनमी के 2023 और 2024 में 0.7 परसेंट रहने का अनुमान है।
भारत-इटली ट्रेड
हालांकि प्रति व्यक्ति आय के मामले में इटली भारत से बहुत आगे है। इटली की पर कैपिटा इनकम जहां 34,084 डॉलर है, वहीं भारत में प्रति व्यक्ति आय 2,450 डॉलर है। माना जा रहा है कि 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर पहुंच सकती है। इटली की प्रति व्यक्ति आय ऊंची होने की वजह यह है कि उसकी आबादी करीब 5.9 करोड़ है जबकि भारत की आबादी करीब 1.43 अरब है। यूरो जोन में इटली भारत का चौथा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। साल 2022 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 14.88 अरब डॉलर रहा था। इस दौरान भारत से इटली को एक्सपोर्ट 60.50% बढ़कर 10.06 अरब यूरो रहा। भारत का इटली से आयात भी 24.23% बढ़कर 4.82 अरब यूरो रहा। 1988 से व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में रहा है।
