नई दिल्ली
भारत की अर्थव्यवस्था में बेहतरी की उम्मीद है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने यह बात कही है। उन्होंने ब्लूमबर्ग टीवी को इंटरव्यू दिया है। राजन के अनुसार, विकास दर अभी भी अपनी क्षमता से कम है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिसंबर तिमाही में विकास दर 6% से थोड़ी अधिक रहेगी। यह जुलाई-सितंबर तिमाही के 5.4% से बेहतर है। लेकिन राजन के मुताबिक, यह नौकरियों के लिए पर्याप्त नहीं है। वह शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं।
राजन ने कहा कि भारत पिछले 25 सालों से लगभग 6% की दर से बढ़ रहा है। यह काफी अच्छा है, लेकिन चीन की तुलना में कम है। उन्होंने कहा, ‘भारत को दो फीसदी और विकास की जरूरत है।’ इससे नए लोगों को रोजगार मिल सकेगा। भारत शुक्रवार को अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के GDP आंकड़े जारी करेगा। कुछ हफ्ते पहले ही आरबीआई के नए गवर्नर ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की थी। यह लगभग पांच साल में पहली बार हुआ था।
तरक्की में रुकावट के पीछे यह वजह
राजन 2013 से 2016 तक RBI गवर्नर थे। उनके अनुसार, ब्याज दरों में कटौती के कदम से भारत की विकास समस्याएं हल नहीं होंगी। उन्होंने कहा, ‘भारत के विकास में रुकावट कर्मचारियों के कौशल और व्यावसायिक जरूरतों के बीच अंतर है।’ उन्होंने कहा, ‘भारत को अपने कौशल का स्तर बढ़ाना होगा। तभी नए लोगों को नौकरियां मिल सकेंगी।’ अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाने के खतरे पर राजन बोले कि भारत व्हाइट हाउस के साथ बातचीत करने को तैयार है। भारत तेल और रक्षा खरीद बढ़ा सकता है।
ट्रेड वॉर पर बातचीत का समर्थन किया
राजन ने कहा, ‘भारत कई क्षेत्रों में टैरिफ कम कर सकता है, जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील नहीं हैं।’ उन्होंने कहा कि यह विकास के लिए बुरा नहीं होगा। कारण है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उद्योग को फायदा होगा। भारत को नौकरियां पैदा करने के लिए और तेजी से विकास करना होगा। राजन का मानना है कि कौशल विकास जरूरी है। इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। अमेरिका के साथ व्यापार विवाद पर राजन ने बातचीत का समर्थन किया। उन्होंने तेल और रक्षा खरीद बढ़ाने की बात कही। राजन ने कहा कि टैरिफ कम करने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
