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पीएफ घोटाले की धीमी रिकवरी… 2,268 में से 521 ही करोड़ मिल पाए, रिटायरमेंट वालों पर पड़ेगा असर

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लखनऊ

पावर कॉरपोरेशन में हुए पीएफ घोटाले का असर आने वाले दो-तीन साल में रिटायर होने वाले बिजली कर्मचारियों के जीपीएफ फंड की वापसी पर दिख सकता है। 2019 में नॉन बैंकिंग फाइनैंशल इंस्टीट्यूशन डीएचएफएल के दिवालिया होने पर पावर कॉरपोरेशन के डूबे करीब 2,268 करोड़ रुपये की रिकवरी मुश्किल में फंस गई है।

पावर कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अब तक पावर कॉरपोरेशन को सिर्फ डूबी रकम का 23.08 प्रतिशत यानी करीब 521 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। वहीं बची रकम को पाने के लिए पावर कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बिजली विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बची रकम को पाना बहुत मुश्किल होगा। ऐसे में अगर सरकार पावर कॉरपोरेशन को मदद नहीं करता है, तो रिटायर होने वाले इंजिनियरों के जीपीएफ भुगतानों पर इसका असर पड़ सकता है।

2030 तक रिटायर हो जाएंगे ज्यादातर अधिकारी-कर्मचारी
पावर कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बिजली विभाग में जितने भी कर्मचारी 2000 के पहले भर्ती हुए थे। उनमें से ज्यादातर कर्मचारी 2030 तक रिटायर हो जाएंगे। इनमें भी 2027 तक बड़ी संख्या में कर्मचारी रिटायर होने वाले हैं।

ऐसे में अगर सरकार मदद नहीं करती है,तो अधिकारियों-कर्मचारियों को जीपीएफ का पैसा पाने में दिक्कत आ सकती है, क्योंकि ये पैसा कर्मचारियों के जमा पैसे से ही दिया जाता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा डीएचएफएल के दिवालिया होने के बाद डूब गया है।

पावर कॉरपोरेशन ने पैसे के लिए शासन को लिखा पत्र
पावर कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जीपीएफ और सीपीएफ ट्रस्ट की बड़ी रकम डीएचएफएल के दिवालिया होने के बाद डूब गई है। बिजली विभाग में जो भी कर्मचारी और अधिकारी रिटायर होते हैं या वीआरएस लेते हैं, उन्हें इसी फंड से देय का भुगतान किया जाता है।

ऐसे में फंड की कमी को देखते हुए पावर कॉरपोरेशन ने शासन से समझौते के मुताबिक रकम का भुगतान करने के लिए पत्र लिखा है। अधिकारी के मुताबिक अगर शासन से रकम मिल जाती है, तो इससे बिजली कंपनियों पर ब्याज के रूप में आने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा। दरअसल, जब डीएचएफएल दिवालिया हुई थी, तब पावर कॉरपोरेशन और बिजली कर्मचारियों के बीच समझौता हुआ था कि अगर डूबी रकम नहीं मिल पाएगी, तो ये पैसा शासन कॉरपोरेशन को ब्याज रहित लोन के रूप में देगा।

क्या है पूरा मामला
  • पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों और कर्मचारी जीपीएफ और सीपीएफ फंड ट्रस्ट में जो पैसा जमा करते हैं, उसे ट्रस्ट द्वारा विभिन्न संस्थाओं में निवेश किया जाता है, जिससे ट्रस्ट को ब्याज मिलता है।
  • आमतौर पर यह रकम सरकारी वित्तीय संस्थाओं में ही जमा की जाती है। मगर ट्रस्ट ने बिजली कर्मचारियों के जीपीएफ और सीपीएफ में जमा करीब 4200 करोड़ रुपये में से 2,268 करोड़ रुपये डीएचएफएल में जमा कर दिए थे।
  • 2019 में जब डीएचएफएल दिवालिया हुआ तो पूरी रकम फंस गई। अभी तक दिवालिया होने की प्रक्रिया में कॉरपोरेशन को सिर्फ 23 प्रतिशत रकम ही मिल पाई है। बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को दी गई थी।

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