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रिलायंस और सेबी में कैसी जंग? अंबानी की कंपनी ने SC में फाइल कर दी कंटेम्प्ट पिटिशन

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नई दिल्ली

देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के बीच ठनी हुई है। मामला दो दशक पुराना है और स्टॉक आवंटन से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सेबी को आदेश दिया था कि वह रिलायंस को कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराए। लेकिन रिलायंस का कहना है कि मार्केट रेगुलेटर ने उसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। उसने सेबी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया है कि मार्केट रेगुलेटर जानबूझकर ऐसा कर रहा है। मुकेश अंबानी की कंपनी ने यह कदम ऐसे वक्त उठाया है जबकि सेबी भी सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर करने की तैयारी में है। यह मामला 2002 का है जब एस गुरुमूर्ति ने रिलायंस के खिलाफ सेबी में शिकायत की थी।

पांच अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को आदेश दिया था कि वह रिलायंस को कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराए। इसके तीन दिन बाद यानी आठ अगस्त को रिलायंस ने सेबी को पत्र लिखकर तीन दस्तावेजों की कॉपी मांगी। 12 अगस्त को सेबी ने कहा कि वह इस मामले में कानूनी सलाह ले रहा है। इसके बाद 16 अगस्त को रिलायंस ने फिर दस्तावेज मांगे। 18 अगस्त को सेबी ने कहा कि वह अपने वकील की सलाह का इंतजार कर रहा है। 20 अगस्त को रिलायंस ने सेबी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी। रिलायंस ने साथ ही सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भी पत्र लिखकर मांग की है कि सोमवार को मामले की तत्काल सुनवाई होनी चाहिए।

क्या है मामला
सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को आदेश दिया था कि वह इस मामले में रिलायंस को कुछ दस्तावेज की कॉपी उपलब्ध कराए। इनमें जस्टिस (रिटायर्ड) बीएम श्रीकृष्ण के फर्स्ट और सेकंड ओपिनियन की कॉपी और वाईएच मलेगम की रिपोर्ट शामिल थी। ये दस्तावेज 2002 के एक मामले से संबंधित हैं। तब एस गुरुमूर्ति ने रिलायंस, उसकी सहयोगी कंपनियों और डायरेक्टर्स के खिलाफ सेबी में शिकायत की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि रिलायंस ने अपने प्रमोटरों से जुड़ी कंपनियों को अवैध तरीके से 12 करोड़ इक्विटी शेयर अलॉट किए थे। साथ ही आरोप लगाया गया था कि रिलांयस और ग्रुप की दूसरी कंपनियों ने इसे फंड किया था।
reliance vs sebi

रिलांयस ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजे पत्र में कहा है कि रिलायंस के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद सेबी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और डॉक्यूमेंट्स की कॉपी नहीं दी। इस बारे में रिलायंस और सेबी को भेजे गए मेल का कोई जवाब नहीं आया। मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि सेबी के पास सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के 30 दिन के भीतर रिव्यू पिटिशन दायर करने का अधिकार है।

कारण बताओ नोटिस
सेबी ने 2002 की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 24 अगस्त, 2011 को रिलायंस के प्रमोटरों को कारण बताओ नोटिस भेजा था। 2020 में सेबी ने सेबी स्पेशल कोर्ट में एक शिकायत दर्ज कराते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी। लेकिन कोर्ट ने सेबी की याचिका का खारिज करते हुए कहा था कि इसमें बहुत देर हो चुकी है। इसके बाद सेबी ने बंबई हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। रिलायंस ने भी हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए तीन दस्तावेजों की कॉपी मांगी थी। हाई कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद रिलांयस सुप्रीम कोर्ट पहुंची जिनसे उसके पक्ष में आदेश दिया

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