घरेलू टेलिकॉम कंपनी जियो और एयरटेल केंद्र सरकार से सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को नीलाम करने की मांग कर रही थी, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया था। हालांकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक गलियारों में घसीटना शुरू कर दिया है। ऐसे में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के नीलामी ने किये जाने की टेक्निकल वजह बता दी है। मंत्री ने कहा कि टेक्निकल और ऑपरेशन वजह से सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की जा सकती है।
कैसे काम करती है नेटवर्क टेक्नोलॉजी
मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में जवाब दिया है कि टेरेस्ट्रियल नेटवर्क और नॉन टेरेस्ट्रिलय नेटवर्क के बेसिक अलग हैं। उन्होंने कहा कि टेरिस्ट्रियल नेटवर्क के स्पेक्ट्रम लोअर फ्रिक्वेंसी पर काम करते हैं। ऐसे में इसे किसी एक इकाई को शेयर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने इंजीनियरिंग और साइंस का हवाला देते हुए कहा कि स्पेक्ट्रम का नीलामी की जा सकती है, क्योंकि कोई इस फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल कोई दूसरा नहीं कर सकता है, जबकि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की जा सकती है।
कैसे काम करता है सैटेलाइट नेटवर्क
सैटेलाइट स्पेक्ट्रम मीडियम अर्थ आर्बिट और लो अर्थ आर्बिट पर काम करते हैं।सिंधिया ने कहा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम हाई एल्टीट्यूड और फ्रिक्वेंसी पर काम करते हैं। ऐसे में इसे किसी के साथ आसानी से साझा किया जा सकता है। ऐसे में इस स्पेक्ट्रम को किसी एक पर्सन या इकाई को नहीं दिया जा सकता है।
सैटेलाइट स्पेक्ट्रम पर मंत्री ने लिया कानून का हवाला
मंत्री ने नए टेलिकम्यूनिकेसन एक्ट 2023 की अनुसूची 1 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा नियम पहले से मौजूद है कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम नीलामी संभव नहीं है, क्योंकि केयू बैंड (लगभग 14 गीगाहर्ट्ज) और केए-बैंड (27.1 से 31 गीगाहर्ट्ज) में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को शेयर किया जा सकता है। ऐसे में इसकी नीलामी सही नहीं है।
सैटेलाइट स्पेक्ट्रम नीलामी के नुकसान
मंत्री की मानें, तो अगर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन किया जाता है कि तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। इससे सरकारी को रेवेन्यू का नुकसान हो सकता है। साथ ही टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि कोई भी देश सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं करती है। यह एक ग्लोबल स्टैंडर्ड है।
कांग्रेस को लिया निशाने पर
उन्होंने कांग्रेस के यूपीए दौर को याद दिलाते हुये कहा कि स्पेक्ट्रम का पहले आओ,पहले पाओ के आधार पर आवंटन हुआ था, जो कि वित्तीय नुकसान और घोटाले की वजह बना था।
