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Friday, April 24, 2026
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क्यों यूक्रेन में फंस गए भारतीय रेल के पहिए? जानिए क्या हो रहा नुकसान

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नई दिल्ली

रेलवे की उत्पादन इकाइयों पर रूस-यूक्रेन संकट का बड़ा असर पड़ा है। इस वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में रेलवे की उत्पादन इकाइयां अपने टार्गेट्स को पूरा करने में नाकाम रही हैं। डिब्बों, पहियों, इंजन और अन्य वस्तुओं का तय समयसीमा में निर्माण नहीं हो पाया है। अधिकारियों ने इसके लिए यूक्रेन संकट के चलते सप्लाई चेन बाधित होने को जिम्मेदार ठहराया है। दस्तावेजों के अनुसार, इस वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में रेलवे के इन आवश्यक सामानों का निर्माण टार्गेट से कम रहा।

यूक्रेन में फंसे पहिए
लंबी दूरी की यात्री रेलगाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले एलएचबी डिब्बों (LHB Coach) के उत्पादन में भी इस अवधि के दौरान कमी आई है। रेलवे ने बताया कि एलएचबी डिब्बों के निर्माण में कमी पहियों की आपूर्ति बाधित होने की वजह से आई है। क्योंकि अधिकतर पहिए यूक्रेन से आयात होते हैं, जो फरवरी से ही रूस के साथ युद्ध में फंसा है। रेलवे ने बताया, ‘‘जहाज पर लादे जा चुके पहिए यूक्रेन में फंस गए। अब इस समस्या का समाधान कर लिया गया है। उत्पादन में कमी की भरपाई बाकी बचे महीनों में कर ली जाएगी।’’

730 डिब्बों की जगह 53 डिब्बों का ही हुआ निर्माण
कारखानों के महा प्रबंधकों के साथ रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ वी.के.त्रिपाठी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें 25 जुलाई तक निर्माण में कमी की जानकारी दी गई। उदाहरण के लिए ईएमयू/मेमू ट्रेन के लिए इस अवधि में महज 53 डिब्बों का निर्माण हुआ। जबकि लक्ष्य 730 डिब्बों के निर्माण का था। इनमें से 28 डिब्बों का निर्माण कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्टरी (RCF) में, 14 डिब्बे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) में और 11 डिब्बे रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्टरी (MCF) में बने हैं।

रेल इंजन उत्पादन लक्ष्य से 28 फीसदी कम
गौरतलब है कि मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (मेमू) और ईएमयू ट्रेनों का संचालन छोटी दूरी के मार्गों पर होता है। ये मार्ग शहरी इलाकों को उप नगरीय इलाकों से जोड़ते हैं। बैठक में मेमू या ईएमयू इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम, 60केवीए ट्रांसफॉरमर और स्वीच कैबिनेट की आपूर्ति में भी कमी पर चिंता जताई गई। दस्तावेज के मुताबिक रेलवे व्हील फैक्टरी अनुपातिक लक्ष्य (पूरे साल के लक्ष्य के अनुपात में उक्त अवधि का लक्ष्य) से 21.96 फीसदी और रेल व्हील प्लांट, बेला 64.4 फीसदी पीछे है। दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि जुलाई तक रेल इंजन उत्पादन तय लक्ष्य से 28 फीसदी कम रहा।

सेमीकंडक्टर की कमी बनी बड़ी बाधा
महा प्रबंधकों से अपील की गई कि इन मुद्दों का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्माण में कोई कमी नहीं आए। रेलवे ने कहा कि मेमू और ईएमयू डिब्बों के उत्पादन में कमी विशेष तौर पर इलेक्ट्रिक पुर्जों की आपूर्ति में कमी की वजह से हुई है। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर को लेकर वैश्विक स्तर पर उत्पन्न संकट के कारण आपूर्ति में कमी की वजह से उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप नहीं हुआ।

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