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ताजमहल को छोड़ सभी स्मारक तिरंगे की रोशनी में जगमगाए, ऐसा क्यों?

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आगरा,

पूरा देश इन दिनों आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर सोशल मीडिया प्रोफाइल्स की डीपी को बदलकर तिरंगा लगाया जा रहा है और हर घर पर तिरंगा फहराने की तैयारी भी है. इसके अलावा सरकारी संस्थानों और स्मारकों को तिरंगे की रोशनी में जगमगाया जा रहा है. आगरा में भी ऐतिहासिक इमारतों को सजाया गया है.

चाहे वह आगरा का लाल किला हो या फिर अकबर का मकबरा. सभी ऐतिहासिक स्मारकों को तिरंगे की रोशनी में जगमगाया जा रहा है, लेकिन ताजमहल में आजादी का अमृत महोत्सव नहीं मनाया जा रहा है. न ही ताजमहल को सजाया गया है और न ही वहां तिरंगे की रोशनी का इंतजाम है. ऐसे में सवाल उठता है कि ताजमहल में जश्न क्यों नहीं हो रहा है?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले आप यह जानिए कि ताज महल ही भारत का पहला स्मारक था, जिसे रात में किसी उत्सव के लिए रोशनी से जगमगाया गया था. आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के सचिव विशाल शर्मा ने बताया कि करीब 77 साल पहले न केवल ताजमहल रोशनी से जगमगाया था, बल्कि स्मारक के अंदर एक भव्य उत्सव का आयोजन भी हुआ था.

आजतक से बात करते हुए आगरा के सीनियर सिटीजन उमा शंकर शर्मा ने बताया कि 8 मई 1945 को जर्मन सैनिकों ने मित्र देशों की सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उस दिन को सहयोगियों द्वारा वाई-डे के रूप में मनाया गया. Y-Day हर साल यूके और संयुक्त राज्य अमेरिका की सेनाओं द्वारा मनाया जाता है.

8 मई 1945 को ताजमहल को रोशनी से जगमगाया था और भव्य उत्सव का आयोजन हुआ था. सीनियर जर्नलिस्ट राजीव सक्सेना ने कहा कि मित्र देशों ने 1942-1946 के बीच आगरा के खेरिया एयरबेस का अपनी वायु सेना के लिए इस्तेमाल किया था. टाटा कंपनी ने 1937-39 के बीच इस एयरबेस पर रनवे का निर्माण किया था, जिस पर 3/डी एयर डिपो ग्रुप का गठन किया गया था. 10वीं वायु सेना 10 मार्च 1942 तक आगरा में रही.

सामाजिक कार्यकर्ता विजय उपाध्याय ने दावा किया कि ताजमहल में आखिरी बार 20 मार्च 1997 की रात को प्रसिद्ध पियानोवादक यानी के शो के दौरान रोशनी से जगमगाया गया था, इस कार्यक्रम की अगली सुबह ताजमहल परिसर में कई कीड़े मरे हुए थे, इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रासायनिक शाखा ने इसकी जांच की थी.

सामाजिक कार्यकर्ता विजय उपाध्याय ने बताया कि इस घटना के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने ही स्मारक के अंदर किसी भी तरह की रोशनी की इजाजत नहीं दी, क्योंकि कीड़ों के मरने की वजह से ताजमहल पर दाग बन जाता था. 1997 से ही ताजमहल को जगमगाने पर प्रतिबंध है, जो अभी भी बदस्तूर जारी है. इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन अभी उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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