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आखिर कांग्रेस से ‘आजाद’ हो गए गुलाम नबी, 4 पेज की दर्दभरी चिट्ठी लिख छोड़ी पार्टी

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नई दिल्ली

कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने आज पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वह लंबे से समय से पार्टी ने नाराज बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा था। कुछ दिन पहले ही आजाद ने कश्मीर में पार्टी के प्रचार समिति से इस्तीफा दे दिया था। सोनिया गांधी को संबोधित अपने इस्तीफे में आजाद ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। आजाद ने अपने पत्र में राहुल गांधी को जमकर कोसा है।

कांग्रेस से ‘आजाद’ हुए गुलाम
गुलाम नबी आजाद पिछले काफी वक्त से पार्टी से नाराज चल रहे थे। कांग्रेस के बागी गुट जी-23 के अहम सदस्य आजाद ने सोनिया गांधी को कांग्रेस में बदलाव को लेकर एक चिट्ठी भी लिखी थी। इस चिट्ठी के बाद काफी बवाल मचा था।

सोनिया को लिखी चिट्ठी में नेहरू, संजय का जिक्र
आजाद ने सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में कांग्रेस से जुड़ने का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि छात्र जीवन में महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से प्रभावित हुआ था। उन्होंने लिखा है कि 1975-76 में संजय गांधी के आग्रह पर जम्मू-कश्मीर युवा कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाला था। आजाद ने लिखा है कि उन्होंने बिना किसी स्वार्थ भाव के दशकों तक पार्टी की सेवा की है।

राहुल गांधी को जमकर कोसा
आजाद ने सोनिया को लिखी चिट्ठी में कहा कि आपके नेतृत्व में पार्टी अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। लेकिन दुर्भाग्य से जब से पार्टी में राहुल गांधी की एंट्री हुई, खासतौर पर 2013 के बाद जब आपने राहुल को उपाध्यक्ष नियुक्त किया, तब से उन्होंने पार्टी में बातचीत का पूरा खाका ही ध्वस्त कर दिया। उन्होंने आगे लिखा है कि सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं साइडलाइन कर दिया गया। अनुभवहीन नेता पार्टी के मामले देखने लगे।

जी-23 के नेता, लंबे समय से नाराज
गुलाम नबी आजाद पिछले काफी समय से पार्टी ने नाराज चल रहे थे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कुछ दिन पहले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद को केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी की प्रचार समिति का प्रमुख नियुक्त किया था, लेकिन आजाद ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि आजाद को राज्यसभा से रिटायर होने के बाद दोबारा उच्च सदन में नहीं भेजा गया था।

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