दिल्ली
चोटिल होने के बावजूद बजरंग पूनिया जब मैट पर उतरे तो उनकी आंखों में जीत की भूख नजर आ रही थी। सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में हुए वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के लाल ने कमाल कर दिया। गोल्ड भले ही हासिल नहीं हुआ, लेकिन ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में चार पदक जीतने वाले भारत के इकलौते पहलवान हैं। यानी जितने भी टूर्नामेंट मैं खेलने गए बिना मेडल लिए वापस नहीं आए।
2013 – ब्रॉन्ज
2018 – सिल्वर
2019 – ब्रॉन्ज
2022 – ब्रॉन्ज
ओलिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट बजरंग पूनिया ने इससे पहले साल 2013 में ब्रॉन्ज, 2018 में सिल्वर और 2019 में फिर से ब्रॉन्ज जीता था। वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के शुरुआती मुकाबले में बजरंग पिछड़ गए थे, लेकिन उन्हें रेपचेज में ब्रॉन्ज मेडल जीतने का एक मौका मिला। उन्होंने रेपचेज के पहले मैच आर्मेनिया के पहलवान वेजगेन तेवान्यान को कड़े मुकाबले में हराया। चोट के कारण उनके प्रदर्शन पर भी असर देखने को मिला। वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के ब्रॉन्ज मेडल के प्लेऑफ मैच में 6-0 से पीछे चल रहे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने वापसी करते हुए 11-9 से जीत हासिल की।
हरियाणा के 28 वर्षीय पहलवान को प्री क्वार्टर फाइनल में सिर में चोट लग गई। दो बार के विश्व कांस्य पदक विजेता एलेजांद्रो एनरिक वाल्डेस टोबियर के खिलाफ वह मैच जरूर जीत गए, लेकिन अपना सिर इंजर्ड करवा बैठा। तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर आगे बढ़ते हुए उन्होंने अगले दौर में यूएसए के यियांनी डायकोमिहालिस से 0-10 से हार मिली। अमेरिकी पहलवान के फाइनल में पहुंचने के साथ, बजरंग को रेपेचेज राउंड से ब्रॉन्ज मेडल का एक और मौका मिला, जिसे उन्होंने दोनों हाथों से भुनाया।
बजरंग और विनेश फोगाट के अलावा सागर जगलान (74 किग्रा), नवीन मलिक (70 किग्रा) और निशा दहिया (68 किग्रा) ब्रॉन्ज मेडल के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके अलावा ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट और कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट रवि दहिया को टूर्नामेंट की शुरुआत में झटका लगा था। वह प्री-क्वार्टर फाइनल राउंड में हार गए थे।
