नई दिल्ली
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड को तीसरे वनडे मैच में 16 रन से हरा दिया। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा। मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 169 रन का स्कोर खड़ा किया था। इंग्लैंड को जीत के लिए 170 रन की जरूरत थी लेकिन टीम इंडिया की गेंदबाजों ने संभलने का मौका नहीं दिया। इंग्लैंड की टीम ने 67 रन के स्कोर पर अपने 7 विकेट गंवा दिए थे लेकिन तभी भारत की जीत के बीच शार्लेट डीन दीवार बनकर खड़ा हो गईं।
नौवें नंबर की बैटर शार्लेट गिरते हुए विकेट के बीच इंग्लैंड के लिए मोर्चा संभाल कर भारत को जीत दूर करने की कोशिश में लग रही और वह कुछ हद कामयाब होते हुए भी दिखी, लेकिन टीम इंडिया की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा की सूझबूझ के आगे उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई है। मैच में दीप्ति ने मांकडिंग का प्रयोग कर शार्लेट को रन आउट किया जो टीम इंडिया की जीत में रोड़ा बन रही थी। शार्लेट ने कभी सोची भी नहीं थी कि वह इस तरह से आउट होंगी।
इंग्लैंड के आखिरी विकेट के रूप में आउट हुईं शार्लेट अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और आंखों ने बहते आंसुओं के साथ उन्हें पवेलियन जाना पड़ा। एक तरफ जहां शार्लेट के चेहरे पर अपनी टीम को जीत ना दिलाने पाने की निराशा और गम छलक रहा था तो दूसरी ओर भारतीय खिलाड़ियों के चेहरे पर जीत की मुस्कान थी। शार्लेट 47 रन बनाकर आउट हुईं।
क्या होता है मांकडिंग
क्रिकेट में मांकडिंग के नियम को लेकर हमेशा से बहस चलती रही है। इस नियम के तहत जब कोई बल्लेबाज नॉन स्ट्राइकर एंड पर गेंदबाज के हाथ से गेंद निकलने से पहले अपना क्रीज छोड़ देता है तो ऐसी स्थिति में गेंदबाज अपनी सूझबूझ दिखाते हुए उस बैटर के छोर वाली विकेट की गिल्लियां को बिखेर सकता है। ऐसे में क्रीज से बाहर उस खिलाड़ी को आउट माना जाता। दरअसल यह नियम बैटर को जल्द से जल्द अपना रन पूरा करने या दो रन लेने की इच्छा पर रोक लगाता है जिससे की बल्लेबाजी कर रही टीम को रन लेने के दौरान मिलने वाला उसका अनुचित फायदा बंद हो जाएगा। मांकडिंग का सबसे पहला प्रयोग 1948 में हुआ था, जब भारत के महान खिलाड़ी वीनू मांकड़ ने ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर बिल ब्राउन को दूसरे छोर पर आउट किया था। उन्होंने इससे पहले बल्लेबाज को चेतावनी भी दी थी। इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलिया की मीडिया ने इसे मांकडिंग का नाम दिया।
