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CM की कुर्सी की लड़ाई के खेल में पायलट को नकारा-निकम्मा तक कह चुके गहलोत, वजह भी जान लीजिए

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जयपुर

राजनीति में एक पार्टी के नेता दूसरी पार्टी के नेताओं और अफसरों पर आए दिन आरोप- प्रत्यारोप लगाते हैं लेकिन दो साल पहले जो आरोप अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर लगाया, उसे सुनकर हर कोई हैरान रहा। अपनी ही पार्टी के नेता, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, उपमुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ रहे सचिन पायलट को अशोक गहलोत ने नकारा और निकम्मा तक कह डाला। गहलोत का यह आरोप देशभर में वायरल हुआ। राजनैतिक दलों में नेता एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाते रहे हैं लेकिन एक गांधीवादी नेता के मुंह से नकारा और निकम्मा कहे जाने का आरोप सुनकर हर कोई हैरान रह गया।

वह नकारा और निकम्मा है, मैं यहां बैंगन बेचने नहीं आया – गहलोत
बात 20 जुलाई 2020 की है जब गहलोत गुट के विधायक दिल्ली रोड़ स्थित एक होटल में कैद थे। सचिन पायलट को मनाने की कोशिशें जारी थी, उसी दौरान गहलोत ने ऐसा बयान दिया जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने पायलट के लिए कहा कि “हम जानते थे कि ये नकारा है, निकम्मा है, कुछ काम नहीं कर रहा है, खाली लोगों को लड़वा रहा है।”

गहलोत ने यहां तक कह दिया कि “मैं यहां बैंगन बेचने नहीं आया हूं। मुख्यमंत्री बनकर आया हूं।” इतना गंभीर आरोप लगाने के बावजूद भी सचिन पायलट ने पटलकर कोई बयान जारी नहीं किया। पायलट मौन साधे बैठे रहे। कभी कभार उनके समर्थक विधायक शायराना अंदाज में रिप्लाई जरूर करते लेकिन सीधे तौर पर प्रत्यारोप लगाकर विवादों से दूर रहे।

सचिन पायलट की वापसी के रास्ते बंद करना चाहते थे गहलोत
सियासी संकट भले ही 2020 में आया हो लेकिन अशोक गहलोत और पायलट के बीच मनमुटाव कई महीनों से चल रहा था। सचिन पायलट एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनका प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर प्रभाव देखा जा सकता है। गहलोत के बाद यही ऐसे नेता हैं जो जाति और क्षेत्र से ऊपर रहते हुए हर वर्ग के लोगों में लोकप्रिय हैं।

गहलोत सचिन पायलट की वापसी के रास्ते बंद करना चाहते थे। इसीलिए गहलोत ने नकारा और निकम्मा वाला बयान दे दिया। गहलोत ने आलाकमान को भी ऐसा ही फीडबैक दिया जिससे कि पायलट पार्टी में वापस आने लाइक नहीं रहे। हालांकि अगस्त के दूसरे सप्ताह में प्रियंका गांधी के प्रयासों के बाद सुलह हुई और सचिन पायलट ने पार्टी आलाकमान का आदेश मानते हुए सरकार के पक्ष में आ गए।

सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं – पायलट
14 जुलाई 2020 को जब सचिन पायलट को पीसीसी चीफ और उपमुख्यमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था। उस समय पर सचिन पायलट ने धैर्य बनाए रखा। जल्दबाजी में कोई विवादित बयान जारी करने के बजाय सचिन पायलट ने सिर्फ एक लाइन का ट्वीट किया। पायलट ने सिर्फ इतना ही लिखा कि “सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। ”

पायलट के इस ट्वीट को करीब 3 लाख लोगों ने लाइक किया। गहलोत की ओर से गंभीर आरोप लगाने के बावजूद पूरे संकट काल में सचिन पायलट ने अपनी पार्टी या नेताओं के खिलाफ ऐसा कोई बयान नहीं दिया जो विवादित हो। सचिन के धैर्य की देशभर में तारीफ हुई।

बीते दो साल में गहलोत ने पायलट पर लगातार तंज कसे
अगस्त 2020 में भले ही कांग्रेस का सियासी संकट टल गया हो लेकिन अशोक गहलोत ने तेवर कम नहीं हुए। बीते दो साल में ऐसे दर्जनों मौके आए जब गहलोत ने सचिन पायलट पर सियासी तंज कसे। वे पायलट को लगातार डैमेज करने की कोशिश में लगे रहे। कई बार मीडिया की ओर से सवाल पूछे जाने पर तो कभी बिना बात के इशारों ही इशारों में ऐसा तंज करके की शर्मिंदा कर जाए।

कार्यकर्ताओं के मान सम्मान की बात को लेकर हाल ही में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शहीद स्मारक पर दिए गए। संबोधन में भी गहलोत तंज कसने से नहीं चूके। आजादी की बातें करने के दौरान ही उन्होंने पायलट को लपेटे में लेते हुए कहा कि ये लोग कार्यकर्ताओं के मान सम्मान की बात करते हैं। अरे आप क्या जानों कि मान सम्मान क्या होता है। इससे पहले गहलोत कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनकी ठीक से रगड़ाई नहीं हुई, सीधे ही राजनीति में मौका मिल गया और बड़े बड़े पदों तक पहुंच गए। उन्हें नहीं पता कि पार्टी को कैसे चलाया जाता है।

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