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गहलोत बने रहेंगे CM या पायलट को कमान? सोनिया दो दिन में लेंगी आखिरी फैसला

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नई दिल्ली,

कांग्रेस में अध्यक्ष पद पर चुनाव के बीच राजस्थान के सियासी घटनाक्रम ने पार्टी हाईकमान की भी मुश्किलें बढ़ा दी थीं. अब धीरे-धीरे राजनीतिक पटाक्षेप शुरू हो गया है. गुरुवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पूरे मामले में बयान दिया है. वेणुगोपाल ने कहा है कि अध्यक्ष पद के लिए 30 सितंबर को नामांकन की आखिरी तारीख है. कल आखिरी नॉमिनेशन के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी. कल तक का इंतजार करना होगा. वहीं, अब खबर है कि सचिन पायलट भी आज शाम 7 से 8 बजे के बीच सोनिया गांधी से मिलने पहुंच रहे हैं.

वेणुगोपाल ने राजस्थान मसले पर भी बयान दिया. उनसे पूछा गया कि क्या अशोक गहलोत सीएम बने रहेंगे? इस पर वेणुगोपाल ने जवाब दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अगले दो दिन में इस संबंध में फैसला लेंगी. बता दें कि आज दोपहर में अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मुलाकात की है. उसके बाद उन्होंने बयान में कहा कि मैंने पूरे घटनाक्रम को लेकर खेद जताया है और सोनिया गांधी से माफी मांग ली है. गहलोत ने ये भी कहा है कि मैं कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लडूंगा. मैं राजस्थान का सीएम रहूंगा या नहीं, ये फैसला सोनिया गांधी पर है.

मुझे घटनाक्रम का पछतावा रहेगा: गहलोत
गहलोत ने आगे कहा- सोनिया गांधी से बातचीत हुई है. पिछले 50 साल में हमने कांग्रेस में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के वफादार सिपाही के तौर पर काम किया. सोनिया गांधी की वजह से राजस्थान का तीसरी बार सीएम बना. हाल के घटनाक्रम ने हिलाकर रख दिया है. ये प्रस्ताव हम मीटिंग में करते. एक लाइन का प्रस्ताव था. दुर्भाग्य से स्थिति बन गई कि प्रस्ताव पारित नहीं करा पाया. एक गलत संदेश चला गया. ऐसा लग रहा था कि मैं राजस्थान का सीएम रहना चाहता हूं. प्रस्ताव पारित कराने की परंपरा रही है. किन्हीं कारणों से मैं उस प्रस्ताव को पारित नहीं करा सका. मुझे इसका हमेशा पछतावा रहेगा. सीएम होने के बावजूद प्रस्ताव पास नहीं करा पाया. मैंने सोनिया जी से सॉरी कहा. मैं कांग्रेस का वफादार सिपाही हूं, मुझे जो घटना हुई राजस्थान में, उसका बहुत दुख है. इस घटना ने कई संदेश दिए. मीडिया किंगमेकर बन जाता है.

जयपुर में विधायक दल की बैठक करनी पड़ी थी रद्द
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी हाईकमान की पहली पसंद अशोक गहलोत को माना जा रहा था. इसके लिए पार्टी ने एक पद एक व्यक्ति का हवाला देकर गहलोत की जगह नए चेहरे का चयन करने के लिए रविवार को जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई थी. पर्यवेक्षक के तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रदेश प्रभारी अजय माकन सीएम हाउस में विधायकों के आने का इंतजार कर रहे थे. इसी बीच, खबर आई कि विधायक को अंदेशा है कि पार्टी हाईकमान सचिन पायलट को अगला मुख्यमंत्री बनाना चाह रहा है.

गहलोत कैंप के विधायकों ने सामूहिक इस्तीफा दिया था
इसी बात का प्रस्ताव मीटिंग में रखा जाना है. कहा जा रहा है कि गहलोत खेमे के विधायक नाराज हो गए और उन्होंने मंत्री शांति कुमार धारीवाल के घर मीटिंग में सामूहिक इस्तीफा दे दिया. उसके बाद बस से स्पीकर के आवास पर पहुंचे. यहां इस्तीफा देकर नाराजगी जताई. बाद में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने पर्यवेक्षकों ने लिखित रिपोर्ट तलब की. जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को क्लीन चिट दे दी गई और तीन विधायकों पर जिम्मेदार बताया गया. पार्टी की तरफ से इन विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. अब सीएम अशोक गहलोत ने दिल्ली आकर पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा.

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव: थरूर बनाम दिग्विजय का मुकाबला?
गहलोत पर सस्पेंस खत्म हो गया है. वह कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे. अब कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव में शशि थरूर और दिग्विजय सिंह का नाम बचा है. दोनों 30 सितंबर को नामांकन कर सकते हैं. एक तरफ दिग्विजय सिंह को गांधी परिवार का सपोर्ट माना जा रहा है. दूसरी तरफ शशि थरूर ने चुनाव लड़ने की इच्छा पहले ही जता दी थी. इसके बारे में जब उन्होंने सोनिया गांधी को बताया था तो सोनिया ने कहा था कि यह फैसला उनका अपना है, कोई भी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ सकता है.

 

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