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क्या आप एक रात गुजार पाएंगे इस कब्रिस्तान में? यहां बच्‍चे पढ़ते हैं और रात को सोते भी हैं

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आगरा

कब्रिस्तान! जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं, हाथ पैर कांपने लगते हैं। लेकिन कब्रिस्तान में बच्चे उछल कूद करें और वहां बैठकर खाना खाएं। यह सब सुनकर हैरत में आना लाजिमी है। मगर चौंकिए नहीं यह हकीकत है। यूपी आगरा के एक कब्रिस्तान में बच्चे ये सब करते हैं। मुर्दों के घरों के बीच जिंदा लोगों ने अपने आशियाने बना लिए हैं। जहां रहने वाले लोगों के बच्चे कब्रों के साथ वह सब करते हैं जो आम बच्चे सुनकर ही डर जाएंगे। कब्रिस्तान में दर्जनों बाहरी लोगों की बस्ती है, जो कहां से आए हैं, किस जनपद के हैं, इसकी आसपास के लोगों को कोई जानकारी नहीं है।

अधिकतर लोगों के पास पहचान पत्र तक नहीं हैं। ये परिवार वर्षों से इस कब्रिस्तान में डेरा डाले हुए हैं। चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस ने इस बस्ती में रहने वाले लोगों के सत्यापन की मांग उठाई है। इस संंबंध में उन्होंने जिलाधिकारी और एसएसपी को पत्र भी लिखा है। उत्तर प्रदेश आगरा के पचकुईंयां क्षेत्र के कब्रिस्तान में एक बड़ी बस्ती है। इस बस्ती में बाहरी जनपदों के कई दर्जन परिवारों ने अपनी झुग्गी-झोपडियां बना ली है। कुछ मकान पक्के भी हैं। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग चौराहों पर गुब्बारे व अन्य सामान बेचने का काम करते हैं।

कब्रिस्तान में चलता है स्कूल
इस बस्ती कुछ संदिग्ध लोग भी हैं, जिनके पास अपने पहचान पत्र तक नहीं हैं। चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट एवं महफूज संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने डीएम और एसपी को भेजे पत्र में कहा है कि ये लोग अलग-अलग जगहों से आकर यहां रह रहे हैं। इनके नाम पते भी संदिग्ध हैं। यह कौन लोग हैं, कहां से आए हैं। एक रहस्य बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कोविड से बचाव के लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से यहां वैक्सीनेशन कैंप लगाया गया था। इस दौरान उन्हें यह भी जानकारी मिली कि कब्रिस्तान में एक विद्यालय भी है। जहां कुछ बच्चे तालीम भी लेते हैं।

भीख मांगते हैं बच्चे
कब्रिस्तान में इस तरह से लोगों के रहने पर नरेश पारस ने सवाल उठाया है कि यहां एक स्कूल संचालित होता है। इसमें आसपास के क्षेत्र से बच्चे पढ़ने आते हैं। बाहरी लोग इस कदर इसे अपनी पनाहगाह बना लेंगे तो अपराधिक प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल सकता है। कब्रिस्तान में मृतक को दफनाने के लिए आने वाले लोगों से बच्चे खाने-पीने की चीजे मांगते हैं। कुछ बच्चे सड़कों पर निकल कर भीख भी मांगते हैं। इससे भिक्षावृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है।

सभी का हो सत्यापन
चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस ने मांग की है कि पचकुईंया क्षेत्र के इस कब्रिस्तान के अंदर रहने वाले सभी लोगों की जांच कराई जाए। सभी का सत्यापन होना चाहिए। बच्चों का बाहर के स्कूलों में दाखिला कराया जाए। उनका नियमित टीकाकरण कराया जाए। बेहतर स्वास्थ्य के लिए उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों से भी जोड़ा जाए।

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