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सामने आ गई चीन की सबसे बड़ी कमजोरी, फाइटर जेट्स उड़ाने के लिए पायलट नहीं, कैसे करेगा ताइवान से युद्ध

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बीजिंग

दुनियाभर को धमकी देता चीन इस समय खुद एक परेशानी में घिरा हुआ है। चीन इस समय फाइटर जेट्स से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर तक रेडी करने में लगा है लेकिन इन्‍हें ऑपरेट कौन करेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। इन दिनों पड़ोसी मुल्‍क बेहतरीन और प्रशिक्षित फाइटर पायलट्स की कमी से गुजर रहा है। इसी साल जून में चीन की नौसेना ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर को कमीशन किया है। साथ ही एक एयरक्राफ्ट कैरियर लॉन्‍च होने वाला है। चीनी नौसेना अब उस पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम में तेजी लाना चाहती है जिसके बाद अच्‍छे पायलट्स तैयार किए जा सकेंगे। इस संकट के बारे में उस समय दुनिया को जानकारी मिली जब ऑर्डनेंस इंडस्‍ट्री साइंस टेक्‍नोलॉजी की तरफ से एक आर्टिकल जारी किया गया। यह एक चाइनीज मिलिट्री मैगजीन है।

पायलट्स ही नहीं मिल रहे
पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी नेवी (PLAN) को इस समय अपने उन फाइटर जेट्स के लिए पायलट्स नहीं मिल रहे हैं जो एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए बने हैं। चीन ने जे-15 जेट्स को खासतौर पर इन एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए बनाया है। प्‍लान ने अब कैरियर बेस्‍ड फाइटर जेट पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम में तेजी लाने की तैयारी कर ली है। एक दशक में यह पहला मौका है लब चीन इस समस्‍या से गुजर रहा है। चीन का सबसे पहला एयरक्राफ्ट कैरियर लियाओनिंग था। लेकिन एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए खास पायलट्स की कमी ने इसकी प्रगति में रुकावट डाली।

फुजियान, चीन का तीसरा और सबसे एडवांस्‍ड एयरक्राफ्ट कैरियर है और पिछले हफ्ते ही इसके सी-ट्रायल्‍स शुरू हुए हैं। पीएलए को कम से कम 200 ऐसे पायलट्स की जरूरत है जो 130 ऐसे जेट्स को एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेट कर सकें। चीन के नेवी विशेषज्ञ ली जेई ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट को इस बात की जानकारी दी है।

हर महीने नई वॉरशिप
चीन का एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान एडवांस्‍ड इलेक्‍ट्रोमैग्‍नेटिक कैटापुलेट्स से लैस है, बिल्‍कुल वैसे ही जैसे अमेरिकी नेवी के सुपरकैरियर गेराल्‍ड आर फोर्ड में भी दिए हैं। जबकि चीन के पहले दो कैरियर्स स्‍की जंप डिजाइन के साथ हैं। ऐसे में नौसेना को नए एयरक्राफ्ट के लॉन्‍च और रिकवरी सिस्‍टम में मास्‍टर होना पड़ेगा। आधिकारिक मीडिया की मानें तो चीन की योजना अमेरिका के बराबर ही अपनी नौसेना को ताकतवर बनाने की है। इसके लिए वह ज्‍यादा से ज्‍यादा एयरक्राफ्ट कैरियर्स को लॉन्‍च करने के लिए तैयार हो चुका है।

एयरक्राफ्ट कैरियर पर पायलट की ट्रेनिंग और एयरक्राफ्ट की डिजाइन सबसे चुनौतीपूर्ण काम है। ली के मुताबिक इसमें दुनिया की सबसे जटिल टेक्‍नोलॉजी शामिल होती है जो कोई किसी के साथ शेयर नहीं करता है। रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो चीन बहुत तेजी से एयरक्राफ्ट कैरियर्स को तैयार करने में लगा है। जबकि उसे जे-15 कैरियर बेस्‍ड फाइटर जेट्स पर अभी बहुत काम करना है। इन जेट्स को एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर तैनाती के लिए बहुत वजनी करार दिया गया है। चीन नौसेना को काफी तीव्र गति से मॉर्डनाइज करने में लगा है। हर एक या दो महीने के अंदर चीन वॉरशिप को लॉन्‍च कर रहा है।

अमेरिका से कर रहा बराबरी
चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक साल 2020 से नौसेना ने हाई स्‍कूल से ग्रेजुएट्स कैडेट्स की सीधी भर्ती शुरू कर दी है। इनकी उम्र 16 से 19 साल है और नई पीढ़ी के नेवी पायलट की औसतन उम्र 20 साल निर्धारित है। नियमों के मुताबिक पहले के पायलट्स की तुलना में उन्‍हें 10 साल छोटा होना होगा। पीएलए नेवी ने वायुसेना की जगह अपने पायलट्स की ट्रेनिंग शुरू कर दी है। यांताई में नेवल एरोनॉटिक्‍स यूनिवर्सिटी से इन पायलट्स को चुना जा रहा है। इसी तरह से अमेरिका भी नौसेना के पायलट्स को ट्रेनिंग देता है।

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