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राहुल ही नहीं अब तो RSS ने भी जता दी बेरोजगारी पर चिंता, केवल घोषणा से नहीं बनेगी बात

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नई दिल्ली

रोजगार के मुद्दे पर विपक्षी दलों की ओर से केंद्र सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने से नहीं चूकते। सरकार की ओर से भी पिछले दिनों संसद में जो बेरोजगारी के आंकड़े पेश किए गए उसके बाद कई सवाल खड़े हुए। वहीं इस मु्द्दे पर अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से भी चिंता जताई गई है। आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने एक दिन पहले ही देश में बेरोजगारी और आय में बढ़ती असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गरीबी देश के सामने एक राक्षस जैसी चुनौती के रूप में सामने आ रही है। संघ की ओर से जो चिंता प्रकट की गई है उससे विपक्ष के सवालों को और अधिक बल मिलेगा। ऐसे में सरकार के लिए घोषणा से कहीं अधिक प्रयास इस दिशा में करना होगा। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से डेढ़ साल में 10 लाख लोगों की भर्ती करने का निर्देश दिया गया है।

वक्त आ गया है कि इस दानव को खत्म किया जाए
देश में बेरोजगारी और आय में बढ़ती असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि गरीबी देश के सामने एक राक्षस जैसी चुनौती के रूप में सामने आ रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठाए गए हैं। दत्तात्रेय होसबोले ने संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में एक दिन पहले कहा कि हमें इस बात का दुख होना चाहिए कि 20 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। वहीं 23 करोड़ लोग रोजाना 375 रुपये से भी कम कमा रहे हैं। गरीबी राक्षस जैसी चुनौती है और यह महत्वपूर्ण है कि इस दानव को खत्म किया जाए। दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि गरीबी के अलावा असमानता और बेरोजगारी दो चुनौतियां हैं जिनसे निपटने की जरूरत है।

होसबोले ने कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित करने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए कौशल विकास क्षेत्र में और अधिक पहल करने का भी सुझाव दिया। आय विषमता को लेकर होसबोले ने सवाल किया कि क्या यह अच्छा है कि विश्व की छह अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद देश की आधी आबादी को कुल आय का केवल 13 प्रतिशत ही मिलता है।

8 साल में क्यों नहीं आए रोजगार, राहुल गांधी के सवाल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान 20 से 24 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर कथित तौर पर दोगुनी होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा। राहुल गांधी ने सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनमी (CMII) के आंकड़े का हवाला देकर एक ग्राफ साझा करते हुए कहा गुमराह, विश्वासघात, धोखा। राहुल गांधी की ओर से जो ग्राफ साझा किया गया उसमें वित्त वर्ष 2017-18 में 20 से 24 साल के नौजवानों के बीच बेरोजगारी दर 21 प्रतिशत थी जो वित्त वर्ष 2021-22 में बढ़कर 42 प्रतिशत हो गई। हाल ही में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़े जाने पर उन पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि आठ वर्षों में 16 करोड़ रोजगार क्यों नहीं आए। राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि 8 चीते तो आ गए, अब ये बताइए, 8 वर्षों में 16 करोड़ रोज़गार क्यों नहीं आए।

मॉनसून सत्र के दौरान संसद में भी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा। राहुल गांधी समेत कई दूसरे कांग्रेसी सांसद महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर काला कपड़ पहनकर विरोध जताने संसद पहुंचे। बेरोजगारी के मुद्दे विपक्षी सदस्यों के अलावा बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने भी अपनी सरकार पर निशाना साधा।

मिशन मोड जरूरी, जल्द मिले रोजगार
इसी साल जून के महीने में केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि अगले डेढ़ साल में दस लाख नौकरियां दी जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इसकी घोषणा की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि सभी विभागों और मंत्रालयों में रिक्त पड़े पदों की समीक्षा करने के बाद अगले डेढ़ साल में 10 लाख लोगों की भर्ती करने का निर्देश दिया है। उन्हें मिशन मोड में यह भर्तियां करने को कहा गया है। सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं।

बीजेपी सांसद वरुण गांधी बेरोजगारी मुद्दे पर सरकार को पिछले दिनों घेरा। संसद में सरकार की ओर से दिए गए बेरोजगारी के आंकड़े पर निशाना साधते हुए वरुण गांधी ने कहा कि सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े देश में बेरोजगारी का आलम बयां कर रहे हैं। पिछले 8 वर्षों में 22 करोड़ युवाओं ने केंद्रीय विभागों में नौकरी के लिए आवेदन दिया, जिसमें से मात्र 7 लाख को रोजगार मिल सका है। वरुण ने सरकार से सवाल पूछा कि जब देश में लगभग एक करोड़ स्वीकृत पद खाली हैं, तब इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है।

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