शिया मुसलमानों का एक समूह है, जिसे हजारा समुदाय कहते हैं। ये दशकों से उत्पीड़न सहते चले आ रहे हैं। अफगानिस्तान में इनकी तादाद देश की कुल आबादी का 10 फीसदी बताई जाती है लेकिन धार्मिक मान्यताओं के चलते इनका जीना मुश्किल हो जाता है। तालिबान हुकूमत आने के बाद एक बार फिर ये निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, कट्टरपंथी सुन्नी मुसलमान इन्हें मुसलमान मानते ही नहीं। पिछले हफ्ते काबुल में हुए एक आत्मघाती हमले में 53 हजारा लोगों की मौत हो गई। इसमें 46 लड़कियां थीं। 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
हजारा बच्चों का कत्लेआम
हमला एक शिक्षण संस्थान में हुआ था जहां हजारा समुदाय के बच्चे परीक्षा दे रहे थे। जिसने भी उस खौफनाक हमले की तस्वीरें देखीं, आंखों से आंसू निकल पड़े। भारत में रह रहे अफगान शरणार्थियों ने आज दिल्ली में प्रदर्शन कर अपने समुदाय के साथ हो रही ज्यादती की ओर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा।
अत्याचार की दर्दनाक दास्तां
हाथों में प्लेकार्ड, बैनर, पोस्टर लिए हजारा समुदाय के लोगों ने इंसाफ की मांग की। प्रदर्शन करने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी थे। उन्होंने कई तस्वीरों में हजारा समुदाय पर हो रहे अत्याचार की कहानी दिखाई थी।
मुसलमान बनें या कब्रिस्तान जाएं…
22 साल पहले जब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था, उस समय भी उसके लड़ाके चुन-चुन कर समुदाय के लोगों को मार देते थे। वे लाशें भी दफन नहीं करने देते। वहां कट्टरपंथी अक्सर कहते सुने जाते हैं कि हजारा मुसलमान बन जाएं या कब्रिस्तान जाएं।
पाक और अफगान हजारा का बुरा हाल
पाकिस्तान में भी हजारा मुस्लिम समुदाय निशाने पर रहता है। पाक और अफगानिस्तान में सुन्नी मुसलमान बहुसंख्यक हैं और वे हजारा समुदाय जैसे अपने ही धर्म के अल्पसंख्यकों से नफरत करते हैं। इनकी महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया जाता है।
कौन हैं ये हजारा
शिया मुसलमानों की यह कौम दरी फारसी की हजारगी बोली बोलते हैं। ये फारसी, मंगोलियाई और तुर्क वंश का एक अफगान जातीय समूह है। इन्हें मंगोल शासक चंगेज खान का वंशज भी माना जाता है। ये सदियों से जुल्म सहन करते आ रहे हैं। गुरुवार को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान समुदाय के लोगों ने अपनी कहानी दुनिया को बताने की कोशिश की।
