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मनाता रह गया अमेरिका पर नहीं माना सऊदी, इस फैसले से मचेगा हाहाकार

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नई दिल्ली,

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे अंतराष्ट्रीय बाजार को अब एक और झटका लगने जा रहा है, जिसका असर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अधिकतर देशों पर पड़ सकता है. दरअसल, ओपेक प्लस देशों ने ऐलान कर दिया है कि वह हर रोज 20 लाख बैरल तेल के उत्पादन में कटौती करेंगे. ओपेक के इस फैसले से अमेरिका की बाइ़डन सरकार की भी चिंता बढ़ गई हैं, क्योंकि अमेरिका में भी तेल के दाम बढ़ते जा रहे हैं और ऐसे में बाइडन अगले आम चुनावों से पहले ही तेल की कीमतों को नियंत्रित करने की योजना में लगे हुए हैं.

अमेरिका ने इसी वजह से दुनिया के बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब से कई बार बातचीत की थी. उसके बावजूद ओपेक का यह फैसला अमेरिकी-सऊदी रिश्तों में खटास ला सकता है, क्योंकि सऊदी अरब ओपेक देशों में काफी प्रभावशाली है और इस फैसले से साफ हो गया है कि वह फिलहाल राष्ट्रपति बाइडन की बात मानने के लिए राजी नहीं है.

खास बात है कि ओपेक देशों का रूस भी सदस्य है. ओपेक में कुल 24 सदस्य हैं, जिनमें सऊदी समेत 13 देश ऐसे हैं, जो तेल उत्पादक हैं, जबकि 11 देश इससे जुड़े हुए हैं. ओपेक देशों की एक मीटिंग में कच्चे तेल के उत्पादन को कम करने का फैसला लिया गया. यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया, जब पहले ही कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. ऐसे में तेल की इतनी बड़ी कटौती का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल सकता है और कच्चे तेल के दाम काफी ऊपर जा सकते हैं.

हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि ओपेक के सप्लाई कम करने के फैसले से बाजार में कच्चे तेल का दाम कितना ऊपर जाएगा. पूरे विश्व में हर रोज 100 मिलियन बैरल तेल की खपत होती है और ऐसे में इतना तय है कि प्रतिदिन दो मिलियन ( 20 लाख ) बैरल की सप्लाई रुक जाने से मार्केट पर दिखने लायक असर तो जरूर पड़ेगा.

एनर्जी एसपेक्ट्स में मैक्रो रिसर्च के चीफ यासेर इलगुइंदी ने इस बारे में कहा कि सऊदी अरब कोशिश कर रहा है कि सप्लाई को रोकने से कच्चे तेल के बैरल की कीमत 100 डॉलर या उससे ज्यादा हो जाए. यासेर ने आगे कहा कि ओपेक इस फैसले से डर बनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे लोगों का ध्यान इस पर जाए. यासेर ने आगे बताया कि आखिरी बार कोरोना काल के दौरान मई 2020 में ओपेक प्लस देशों ने तेल के उत्पादन को कम किया था, जिसके बाद से उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाया ही जा रहा है.

सऊदी अरब और अमेरिका की बिगड़ेगी बात!
ओपेक प्लस देशों के तेल कटौती के फैसले को अमेरिकी व्हाइट हाउस ने कहा कि ये फैसला बिल्कुल भी दूरदर्शी नहीं है. साथ ही कहा है कि अमेरिका अपने तेल के रिजर्व से एक करोड़ बैरलों को बाजार में अगले महीने तक सप्लाई कर देगा.

हालांकि, ओपेक का फैसला जाहिर तौर राष्ट्रपति जो बाइडन को बिल्कुल पसंद नहीं आएगा, जो कुछ महीनों पहले ही जब सऊदी अरब यात्रा पर पहुंचे थे. सऊदी पत्रकार जमाल खागोशी की हत्या का आरोप झेल रहे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ही उनकी मेजबानी की थी.

सऊदी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति जो बाइडन ने सऊदी अरब से तेल का उत्पादन बढ़ाने की अपील की थी. उस समय जो बाइडन की यात्रा काफी चर्चा में भी रही थी. जो बाइडन को भी कहीं न कहीं उम्मीद थी कि सऊदी उनकी बात का पूरा ध्यान रखेगा, लेकिन अब ओपेक के इस फैसले से साफ हो गया है कि सऊदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की बात को आगे नहीं रखा, जिसे बाइडन की कूटनीतिक हार भी कही जा सकती है.

 

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