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‘नो रिपीट’ पार्ट-2 के मूड में नहीं बीजेपी, टिकट बांटने में सिर्फ एक शब्द पर रहेगा फोकस

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अहमदाबाद

गुजरात विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी अपनी रणनीति में बदलाव करती हुई दिख रही है। पहले बड़े स्तर पर विधायकों की टिकट काटने की अटकलें लगी रही थी, लेकिन अब आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी ज्यादा विधायकों के टिकट नहीं काटना चाहती है। पार्टी 20 से 25 फीसदी नए चेहरों को ही मौका देगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह इन दिनों गुजरात के प्रवास पर हैं। 25 अक्तूबर को अमित शाह ने सोमनाथ में चौथे और अंतिम जोन की बैठक ली। दिवाली पर गुजरात पहुंचे शाह ने भी पार्टी नेताओं से मिलने की योजना बनाई थी। उसी के तहत वे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से लगातार मिल रहे हैं। 26 अक्तूबर को शाह अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। शाह ने इससे पहले वडोदरा, सूरत, पालनपुर में भी बैठकें की थी। पार्टी विधानसभा चुनावों में नो-रिपीट की बजाए अब विनेबिलिटी पर फोकस करेगी। अगर प्रत्याशी जीतने वाला है तो उसके टिकट में नो-रिपीट थ्योरी आड़े नहीं आएगी। उम्मीद की जा रही है कि अब 45 से 50 नए चेहरों को ही उतारेगी।

नो-रिपीट नहीं, रिकॉर्ड पर नजर
बीजेपी गुजरात विधानसभा चुनावों में आप की एंट्री को फायदे के तौर पर देख रही है। पार्टी को उम्मीद है कि त्रिशंकु चुनाव में बीजेपी को फायदा होगा। इसलिए पार्टी ने मध्य, उत्तर, दक्षिण गुजरात के साथ सौराष्ट्र क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की दिशा में काम शुरू कर दिया है, पार्टी की कोशिश है कि केंद्र और राज्य सरकार के काम के बल पर 150 सीटों तक पहुंचा जाए। 1985 में तत्कालीन कांग्रेस नेता माधव सिंह सोलंकी ने 149 सीट जीतकर एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया था। सोलंकी ने यह कीर्तिमान खाम थ्योरी के बल पर बनाया था। बीजेपी इस रिकॉर्ड को तोड़ना चाह रही है। इसके लिए पार्टी ने अब विनेबिलिटी पर फोकस करने का फैसला किया है। मसलन, जिताऊ (विनेबिलिटी) उम्मीदवार को मौका दिया जाएगा। ऐसे में वह कितनी बार से विधायक है। उसकी उम्र कितनी है। ये पैरामीटर आड़े नहीं आएंगे। गुजरात में बीजेपी ने मोदी के करिश्माई नेतृत्व में अभी तक सर्वाधिक 127 सीटें ही जीती हैं, जबकि न्यूनतम स्कोर 99 सीटों का है। पार्टी ने पिछले साल सिंतबर महीने में जब सीएम विजय रुपाणी को हटाया था, तब नो रिपीट थ्योरी लागू करते हुए सभी मंत्री भी बदल दिए थे।

सांसद भी ठोंक सकते हैं ताल
कुछ दिन पहले भरूच से बीजेपी के सांसद मनसुख वसावा ने विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। वसावा ने कहा था कि अगर पार्टी टिकट देगी तो वह विधानसभा चुनाव लड़ना चाहेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश में दो से तीन सांसद विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी बनाए जा सकते हैं। इसमें से दो सांसदों को सौराष्ट्र में प्रत्याशी बना जा सकता है। सौराष्ट्र में विधानसभा की 48 सीटें हैं। कच्छ की छह सीटों को जोड़कर इस रीजन में कुल सीटों की संख्या 54 हो जाती है। 2017 के चुनाव में यहां बीजेपी को नुकसान हुआ था। पार्टी 150 तक पहुंचने के लिए अब चुनावी रणनीति में बदलाव करती हुई दिख रही है।

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